Friday, 19 May 2017

Facebook essay in hindi


Written By - Chandra Shekhar Sahu

Facebook essay in hindi



सोशल मीडिया आज किस तरह आम आदमी के जीवन का हिस्सा बन चुका है ,इसका अंदाज़ सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है की आज लगभग हर व्यक्ति सोशल मीडिया पर आसानी से नज़र आ जाएगा | फेसबुक , ट्विटर ,गूगल प्लस आदि सोशल साइट्स लोगों के विचारों के संप्रेषक बन चुका है ,आपसी जुड़ाव का सेतु बन चुका है |





विचारों की महानता ही व्यक्ति को जीवन की महत्तम ऊंचाइयों तक पहुंचाती है, विचार ही सफलता के सूचक या प्रबोधक है | विचारों की आधारशिला पर ही एक उन्नत भविष्य की नींव रखी जाती है जो की एक सुखद राष्ट्र की परिकल्पना को मूर्त रूप देने की जननी है |इन्ही विचारों को लोगों तक पहुंचाने का जरिया सोशल मीडिया है | सोशल मीडिया वास्तविक रूप में शब्दों या विचारों की क्रांति है | विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निःसंदेह किसी भी व्यक्ति का एक सीमित अधिकार है |

चूँकि मन की चंचलता को समझ पाना एक मुश्किल काम है , प्रजा के विचार सदैव मेल नहीं खाते | वैसे
वास्तविकता में किसी व्यक्ति के विचारों की ग्राह्यता अथवा अस्वीकार्यता का परिमाण ज्ञात करना एक जोखिम भरा कार्य है ,क्यूंकि विचारों के परिमाण को ज्ञात करने वाला तराजू आज भी अस्तित्व में नहीं है | किसी व्यक्ति के विचारों को पसंद करना या नापसंद करना चयन करने वाले व्यक्ति के मानस पर पूर्णतः निर्भर है | प्रत्येक व्यक्ति सिर्फ उन्ही विचारों को ग्रहण करता है जो किसी न किसी रूप में उसके मानस पटल पर आनंद उकेरित करे |

व्यक्ति उन्ही विचारों को नापसंद करेगा जो उसके हित में ना हो | चूँकि हर ख़ुशी को अथवा गम को (वास्तविक रूप में यह दोनों शब्द स्वतंत्र है परन्तु सापेक्ष भी) अभिव्यक्ति के रूप में शेयर करना एक मानवीय प्रवृत्ति है |आज मौजूद सोशल मीडिया इस काम को पूर्ण करने में एक सिपहलसार की भांति खड़ा हुआ है ठीक डाकिया बाबू की तरह | सम्प्रेषण क्रांति के इस दौर में सोशल मीडिया सबसे किफायती और मजबूत कदम माना गया है | वर्तमान समय में हर राजनैतिक पार्टी , या प्रशासनिक महकमा या सामजिक संगठन सोशल मीडिया पर मौजूद है , जहँ पर इनका जुड़ाव आम आदमी से बेहद आसानी से संभव है |

सोशल मीडिया एक सामजिक बदलाव का मंच उभरकर जो 21वीं सदी के प्रारम्भ में आया है, उसकी सफलता अकल्पनीय है | दूसरे शब्दों में सोशल मीडिया को जान समस्या निवारण का मंच कहना उचित होगा | आज समस्या चाहे सांप्रदायिक हो या जातिवाद की ,चाहे राजनैतिक या प्रशासनिक हर समस्या की और ध्यान आकर्षित करना ही सोशल मीडिया की खासियत है |

भ्रष्टाचार,बालविवाह ,बाल मजदूरी ,महिला उत्पीड़न जैसी अनगिनत समस्यायों की जानकारी न सिर्फ लोगों को हुई बल्कि इन सोशल साइट्स के माध्यम से हल भी हुई | उत्तराखंड में आई बाढ़ में सोशल मीडिया के एक तंत्र व्हाट्स एप का योगदान किसी से छुपा नहीं है | खाप पंचायतों अथवा अनर्गल फतवों के विरुद्ध सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों लोगों की मोर्चाबंदी वाक़ई में काबिल ए तारीफ़ है | झूठे वादे कर वोट हासिल करने वाले नेता अब बैकफुट पर आ गए है | अब उन्हें वादे तोल मोल कर ही करने पड़ते है | सोशल मीडिया की वजह से अब नेताओं के रूख में जो बदलाव आया है वाक़ई में एक बेहतरीन कल का लक्षण है |

सोशल मीडिया आज जन जन की आवाज़ बन चुका है | कोई दो राय नहीं है की कुछ लोग धर्म, जाती , पंथ के नाम पर सोशल मीडिया पर जहर उगलने का कार्य कर रहे हैं और खुद को धर्म रक्षक की तथा कथित उपाधियाँ दे रहे है, वास्तव में ऐसे लोग राष्ट्र निर्वाण का कार्य कर रहे हैं | अतः ऐसी ओछी मानसिकता वाले लोगों की अभिव्यक्ति का अधिकार छीनकर जेलों में ठूंस दिया जाए तो कोई मानवाधिकार का हनन नहीं होगा |

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