पैगाम ए मुहब्बत है आया
दिल मेरा है घबराया
जान ए तमन्ना को लिख दू ख़त
करू में इज़हार ए मुहब्बत||१||
सोच कर थोडा घबरा जाता हूँ
इंशाल्लाह कुछ नहीं कर पाता
हूँ
दिल ए दर्द को सीने में छुपा
कर
काफी सोंच कर ख़त लिख पाता हूँ
बड़ी शिद्दत से ख़त लिखता जाता
हूँ
जाकर पोस्ट ऑफिस थोडा सकपका
जाता हूँ
मोहतरमा ए बाप के डर से वापस
भाग आता हूँ||३||
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