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                                                शीर्षक - नैतिक शिक्षा


बेहद शर्म कि बात है कि आज भी हिंदुस्तान में इतिहास के नाम पर लुटेरों का इतिहास पढ़ाया जा रहा है और नैतिक सिद्धांतों कि अनदेखी की जा रही है | हमे स्वामी विवेकानंद , महर्षि अरविन्द , महर्षि रमन के बारे में नहीं बताया जाता | नैतिक शिक्षा लुप्त हो गई है और आज हम चैराहे पर बैठकर राष्ट्र के विकास की बात तो करते हैं पर नैतिक विकास की नहीं | कमी हमारे अंदर है , राष्ट्र को कमजोर हम लोगो ने ही किया है ,किसी को दोषी बना देना बहुत आसान है, आज कोई नेता,अफसर, चोर है , लुटेरा है तो जिम्मेदार वो नहीं बल्कि आप भी है | नैतिक सिद्धांतों का थोडा सा भी आभास अगर होता तो राष्ट्र आज भ्रष्टाचारियों,अपराधियों का गढ़ नहीं बल्कि राष्ट्र देशभक्तों से लबरेज़ विश्व गुरु होता | यूँ थोड़ी भी नैतिकता होती तो पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे कश्मीरी युवा मेरठ यूनिवर्सिटी में ना लगाते | आज कुछ कट्टरपंथी ताक़ते हिंदुस्तान में अस्थिरता पैदा कर रही है | एक सांसद वन्देमातरम के दौरान संसद को छोड़ देता है , तो बखेड़ा खड़ा हो जाता है | किसी बात से सहमत नहीं होना उसका विरोध नहीं होता , हिंदुस्तानी मीडिया भी ऐसे मुद्दों पर गैर जिम्मेदार हो गई है | किसी व्यक्ति की राष्ट्र के प्रति निष्ठां को सिर्फ वंदे मातरम के तराजू में तोलना कहा तक उचित है ? अगर किसी को वन्देमातरम के गायन में रूचि नहीं है तो वो उसका धार्मिक मामला है और धर्म निरपेक्ष राष्ट्र होने के नाते किसी पर थोपा नहीं जा सकता | नैतिक शिक्षा की ही कमी रही होगी मीडिया के कर्मचारियों में |
आज युवाओं की सोंच का दायरा सिमित रह गया है आँख खुले तो जॉब या कंप्यूटर और आँख बंद हो तो सिर्फ कोरे सपने | आखिर युवा जीवन का छोटा सा हिस्सा राष्ट्र प्रगति के लिए समर्पित करने को तैयार है ? आज युवा को वक़्त कहा है , ऐसा कुछ सोंचने के लिए | नैतिक शिक्षा पढ़ी होती तो युवा यूँ मनचला न होता ? आज वक़्त है कुछ करने का राष्ट्र हित में , क्यूंकि युवा का उबलता खून पूरी दुनिया बदल देता है |
आज कुछ तथाकथित राष्ट्र वादी युवा फेसबुक पर नफरत फ़ैलाने का काम कर रहे है , और लोगों की धार्मिक भावनायें तक आहत कर रहे है | अगर नैतिक शिक्षा का थोडा सा भी ज्ञान होता तो युवा ऐसी ज़ुर्रत नहीं करता | क्यूंकि नैतिक शिक्षा के पढ़ने के बाद नफरत का सफाया दिल से हो जाता है , दिमाग से हो जाता है | अगर राष्ट्र को बदलना है तो सिर्फ पेट भरने की शिक्षा इंजीनियरिंग मेडिकल से काम नहीं चलेगा , नैतिक शिक्षा ही युवा के नैतिक पतन का खात्मा और राष्ट्र प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है |
फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है की नैतिक शिक्षा को सिलेबस में शामिल किया जाएगा , लेकिन कोई शक नहीं की हर वो घटना जो दिल को झकझोर कर रख दे उसका जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ किसी शख्स को ही बताया जाएगा उस शख्स की नैतिक कमजोरी को नहीं |

युवाओं के बदलते रवैये से निराश कलम लिखना जारी रखेगी |

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