चन्द्रशेखर
साहू
यू
ंतो जयपुर अपनी पुरातात्विक विरासत के लिए प्रसिद्ध
है लेकिन पुलिसीया ढीलेपन की वजह से
राजधानी अपराध के मामले में
भी नित नए आयाम छू
रही है। हाल ही में जारी
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अपराध संबंधी
आंकडों के अनुसार जयपुर
शहर ने देशभर में
चौथा स्थान प्राप्त किया है जो कि
जयपुर पुलिस की नाकामी को
साफ साफ दर्शा रहा है। यह आंकडे राजधानी
पुलिस समेत राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर
सवालिया निशान खडा कर रहे हैं।
होम
मिनिस्टर पुलिस मुख्यालय में चाहे आए दिन अपराधों
पर लगाम लगाने के लिए मिटिंग्स
लेते हो लेकिन जमीनी
स्तर पर कारगर परिणाम
नहीं आना आ पा रहे
हैं। ऐसे में इस तरह की
मीटिंग्स सिर्फ ढकोसले साबित हो रही हैं
और इन मिटिंग्स का
असर सिर्फ पुलिस मुख्यालय तक ही सीमित
रह गया है। राजधानी
में वर्ष 2015 में कुल 26288 मुकदमें दर्ज हुए जो कि देशभर
में चौथे नंबर पर हैं। यह
आंकडे जयपुर पुलिस की कार्यषैली पर
प्रश्नचिन्ह खडे कर रहें हैं।
साथ ही राज्य सरकार
की जवाबदेही पर भी सवालिया
निशान लगा रहे हैं। जोधपुर शहर अपराधों के मामलों में
उन्नीसवें नंबर पर है जहां
पर 11882 मुकदमें दर्ज हुए हैं।
एक
के बाद एक आपराधिक वारदातें
दर्ज होने के बावजूद पुलिस
मूकदर्शक बनी हुई है। ऐसे में क्या सरकार को नाकारा हुई
पुलिस व्यवस्था में कोई आमूलचूल परिवर्तन करने की जरुरत है।
क्या राज्य सरकार ने जयपुर को
क्राइम फ्री सिटी करने की तमाम कोशिशें
की है। अगर हां तो फिर दर्ज
मुकदमों में कमी क्यों नही हो रही हैं।
यह इस बात का
साफ इशारा हैं कि राज्य सरकार
के तमाम प्रयास विफल साबित हो रहे हैं।
यह
है देश की टॉप टेन
क्राइम सिटिज एनसीआरबी 2015
क्रमांक शहर
मुकदमें देशभर
में प्रतिशत
1 दिल्ली 173947 25.7
2 मुम्बई 42940 6.4
3 बैंग्लौर 35576 5.3
4 जयपुर 26288 3.9
5 कोलकाता 23990 3.5
6 इन्दौर 18463 2.7
7 हैदराबाद 16965 2. 5
8 पटना 16871 2 .5

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