जयपुर। केन्द्र सरकार की तर्ज पर अब राज्य सरकार भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ तीन माह में चालान पेश होगा इसको लेकर किसी भी विभाग से इजाजत लेने की जरुरत नही पडग़ी इसको लेकर बकायदा राज्य सरकार ने एक प्रस्ताव गृह विभाग के जरिए बनाया गया है। एक बार चर्चा के बाद केबिनेट मेे पास किया जाएगा। इसको लेकर आला-अधिकारी इस मसौदे पर चर्चा कर रही है। अगले माह से लागू होने की संभावना है।
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार केन्द्र सरकार ने पांच माह पहले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एक कानून बनाई है जिसके तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने पर उसके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के लिए उसके उसके मूल विभाग से इजाजत लेने की जरुरत नही है। कम से कम समय में उसके खिलाफ चालान पेश किया जाए। जिससे उसको सजा मिल सके इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज होने के बाद उसके खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी। इसी तरह राज्य सरकार ने नया कानून का मसौदा तैयार किया है यह मसौदा गृह विभाग से तैयार किया गया है। जिसके तहत राज्य में सरकारी सीट पर बैठकर किसी भी तरह भ्रष्ट्राचार करने पर,आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज होने पर तय समय में उसके खिलाफ कार्यवाही होगी इसको लेकर एसीबी को ना तो उनके मूल विभाग से इजाजत लेने की जरूरत नही पड़ेगी इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जब तक एसीबी अभियोजन स्वीकृति के लिए इजाजत मांगती तक तक गवाह मुकरे जाते जिससे एसीबी सजा नही दे पाती है। इन सभी बातों का ध्यान में रखते हुए इस मसौदे को तैयार किया है। इस मसौेदे को आला आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की एक कमेटी ने तैयार किया है। जिसके बाद भ्रष्ट्र अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही हो सके।
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार केन्द्र सरकार ने पांच माह पहले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एक कानून बनाई है जिसके तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने पर उसके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के लिए उसके उसके मूल विभाग से इजाजत लेने की जरुरत नही है। कम से कम समय में उसके खिलाफ चालान पेश किया जाए। जिससे उसको सजा मिल सके इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज होने के बाद उसके खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी। इसी तरह राज्य सरकार ने नया कानून का मसौदा तैयार किया है यह मसौदा गृह विभाग से तैयार किया गया है। जिसके तहत राज्य में सरकारी सीट पर बैठकर किसी भी तरह भ्रष्ट्राचार करने पर,आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज होने पर तय समय में उसके खिलाफ कार्यवाही होगी इसको लेकर एसीबी को ना तो उनके मूल विभाग से इजाजत लेने की जरूरत नही पड़ेगी इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जब तक एसीबी अभियोजन स्वीकृति के लिए इजाजत मांगती तक तक गवाह मुकरे जाते जिससे एसीबी सजा नही दे पाती है। इन सभी बातों का ध्यान में रखते हुए इस मसौदे को तैयार किया है। इस मसौेदे को आला आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की एक कमेटी ने तैयार किया है। जिसके बाद भ्रष्ट्र अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही हो सके।
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