Tuesday, 21 April 2015

अस्पताल की लापरवाही से युवक की मौत

पिता की अर्थी के पास रातभर सड़क पर बैठा रहा यशवीर 
एपेक्स अस्पताल प्रशासन पूरी तरह निष्ठुर
जयपुर। मालवीयनगर स्थित एपेक्स हॉस्पिटल में मंगलवार को दुर्घटना में घायल हुए एक युवक की मंगलवार सवेरे मौत हो गई। घटना के बाद से गुस्साए स्थानीय लोगों और परिजनों ने शव को अस्पताल के
बाहर रखकर कई घंटों तक प्रदर्शन किया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के विरुद्ध इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए घायल युवक की मौत का जिम्मेदार अस्पताल प्रशासन को ठहराया है। मृतक की पत्नी और उसका 8 वर्षीय इकलौता पुत्र अस्पताल के सामने शव को रखकर बैठज्ञ हुआ है। लेकिन बेदर्द हुआ अस्पताल प्रशासन मृतक के परिजनों की मुआवजे की मांग को लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ विचार करेंगे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कर्णसिंह(30) निवासी मालवीयनगर 15 अप्रेल को बाइक लेकर घर पर लौट रहा था। तभी श्री हॉस्पिटल के बाहर एक ट्रक ने बाइक को टक्कर मार दी जिसमें वह गंभीर घायल हो गया था और उसका उपचार एपेक्स हॉस्पिटल में जारी था। मृल रूप से वह नेपाल का रहने वाला था। स्थानीय लोग अस्पताल प्रशासन से 20 लाख रुपए के मुआवजे की मांग को लेकर बाहर डटे हुए थे।

पिता की मौत से बेखबर
मृतक कर्णसिंह के मित्र विनोद ने बताया कि कर्णसिंह हमेशा ही अपने इकलौते 6 वर्षीय पुत्र यशराज को इंजीनियर बनाने के सपने देखता था और इसेक लिए वह कंपनी में 18-18 घंटे तक काम करता था ताकि उसके बच्चे का बेहतर भविष्य बन सके। लेकिन कू्रर नियति और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से यशराज के सिर से उसके पिता  का साया पूरी उठ चुका है। घर में सिर्फ कर्णसिंह की पत्नी श्वेता और उसका 6 वर्षीय पुत्र यशराज ही जीवित है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की घोर और अक्षत्या लापरवाही ने इन दोनों जिन्दगियों के जीवनकाल अंधेरा कर दिया है।    

यूं सामने आई अस्पताल प्रशासन की लापरवाही
मृतक कर्णसिंह की पत्नी श्वेता के अनुसार पति कर्णसिंह एक निजी कैटरिंग कंपनी में कर्मचारी था। वह 15 अप्रेल को घर पर लौट रहा था उसी श्री हॉस्पिटल के सामने एक बेकाबू ट्रक ने उसे टक्कर मार दी थी जिसमें घायल कर्णसिंह को एपेक्स अस्पताल में भर्ती करवाया था। इलाज के बाद दो दिन बाद ही अस्पताल प्रशासन ने कर्णसिंह को छुट्टी दे दी थी लेकिन आराम नहीं होने पर उसे फिर अस्पताल में भर्ती करवाया। 18 अप्रेल को अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने उसके बाएं पैर को काटने की सलाह दी जिसकी सहमति के बाद ऑपरेशन कर चिकित्सकों ने उसके पैर को अलग कर अस्पताल प्रशासन ने कर्णसिंह की पत्नी श्वेता को इलाज के लिए 80 हजार रुपए जमा करवाने को कहा गया। श्वेता ने गहने बेचकर जैसे-तैसे 80 हजार रुपए जमा करवा दिए लेकिन रुपए जमा करवाने के महज 10 मिनट बाद ही आईसीयू में उसे करीब 4 बजे मृत घोषित कर दिया। मृतक का पोस्टमार्टम जयपुरिया अस्पताल में करवाकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया। जिसके बाद सथनीय लोग एपेक्स असपताल के बाहर जमा हो गए। श्वेता का कहना है कि इलाज में उसने गहने बेचकर और बैंक अकाउंट में जमा करीब 2 लाख रुपए अपने पति के इलाज में खर्च कर दिए। श्वेता ने सीधे तौर पर अस्पताल प्रबंधन को घटना का जिम्मेदार ठहराते हुए 20 लाख रुपए मुआवजे की मांग की।

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