Wednesday, 22 April 2015

व्यापारी के अपहरण में महिला गिरफ्तार

दुर्दांत अपराधी आनंदपाल गिरोह से जुड़े मिले घटना के तार
जयपुर। सीकर शहर से 10 दिन पूर्व सर्राफा व्यापारी के अपहरण के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
महानिरीक्षक पुलिस(जयपुर रेंज) डीसी जैन ने बताया कि 9 अप्रेल को सीकर शहर से एक सर्राफ ा व्यापारी का फि रौती वसूली करने की नीयत से अपहरणकर लिया गया था।
एक आपराधिक गैंग ने फि रौती वसूल करने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया था। घटना के वक्त अपह्त ज्वैलर के पास मोबाइल नहीं था। गैंग ने पीडि़त का मोबाइल फ ोन मंगवाने के लिए गैंग के एक सदस्य को पीडि़त के वाहन से ही उसके घर भेज कर मोबाइल फ ोन मंगवाया था लेकिन परिजनों को शक होने पर आरोपी को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
वारदात में आनंदपाल गैंग का हाथ
डीसी जैन ने बताया कि मनीष से पूछताछ पर इस साजिश में आनन्दपाल गैंग की सदस्या अनुराग उर्फ  अनुराधा चौधरी का नाम सामने आया। पुलिस को इसी गैंग से जुड़े अपराधी गुलजारी ने पूछताछ में बताया कि इस वारदात के कुछ दिनों पूर्व इसी गैंग ने जिला अजमेर के मदनगंज-किशनगढ़ क्षेत्र से दो व्यापारियों का फि रौती वसूलने की नीयत से अपहरण किया था। इसी गैंग ने नागौर जिले के डीडवाना थाना इलाके में पूर्व में हुए हत्याकांड़ के गवाह को डराने और धमकाने की नीयत से उसका भी अपहरण किया था।

पुलिस मुख्यालय स्तर पर हुई थी बैठक
आनंदपाल गिरोह की बढ़ती सक्रियता से चिंतित पुलिस महानिदेशक ने मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस मुख्यालय स्तर पर इस विषय पर गंभीर मंथन के बाद पुलिस महानिदेशक मनोज भट्ट ने एसओजी और संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों समेत रेंज महानिरीक्षकों की बैठक ली। इस बैठक में आनंदपाल गिरोह के अलावा अन्य सक्रिय आपराधिक गिरोह की गतिविधियों पर रोक लगाने और इनसे जुड़े अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने  के निर्देश जारी किए। डीजीपी भट्ट ने अधिकारियों को निर्देंश दिए कि प्रदेशभर में इस तरह के किसी भी आपराधिक गिरोह को सक्रिय नहीं होने दिया जाए।

और हरकत में आई पुलिस....
पुलिस मुख्यालय से आदेश जारी होने के बाद जयपुर रेंज में पुलिस और एसओजी की अलग-अलग टीमें गठित कर गैंग से जुड़े अपराधियों की युद्ध स्तर पर तलाश की गई। टीम ने कड़ी मेहनत के बाद मंगलवार को आपराधिक गिरोह की सदस्या अनुराग उर्फ  अनुराधा चौधरी को जयपुर से अपने एक साथी मनीष के साथ पकड़ लिया। पुलिस अधीक्षक सीकर ने इस पर पांच हजार रुपए का ईनाम घोषित कर रखा था। मनीष इस आपराधिक गिरोह के लिए अपहरण के लिए किसी बिल्डर और व्यवसायी का चुनाव करता था और अन्य आरोपियों के छिपने के ठिकाने और वाहनों को उपलब्ध करवाने में सहयोग करता था। पुलिस मामले में दोनों आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है।

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