मुख्यमंत्री के बजट भाषण के दौरान टूट गई पंरपरा
फसल खराबे और पंचायत पुनर्गठन पर घिरे मंत्री
विधानसभा समीक्षा
राज्य विधानसभा के बजट सत्र की हंगामेदार शुरआात के बाद से ही सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष में उन्नीस बीस का खेल सदन के अंदर और बाहर चलता रहा है। युवक कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के बाद सदन से नौ विधायकों के निंलबन के कारण सत्ता पक्ष सदन में दमदार तो विपक्ष बाहर एकजुट दिखाई दिया।
सदन में कांग्रेस के विधायकों की अनपुस्थिति में सत्तापक्ष ने ही प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई और अपने ही मंत्रियों को खूब घेरा। राज्यपाल के अभिभाषण की तरह ही विपक्ष सदन की नेता और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के भाषण के समय गायब रहा और इस तरह बजट प्रस्तुत करते समय प्रतिपक्ष की अनुृपस्थिति से एक और पंरपरा टूट गई कि बजट भाषण के समय प्रतिपक्ष भी सदन में उपस्थित रहता है। फसल खराबे के मामले और पंचायतों के पुनर्गठन मामले में सरकार अपनों से ही घिरती नजर आई।
राज्य विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के समय भी परंपरा टूटी और दूसरी बार मुख्यमंत्री के बजट भाषण प्रस्तुत करने के समय भी परंपरा टूटी। आमतौर पर ऐसा होता आया है कि राज्यपाल के अभिभाषण और मुख्यमंत्री के बजट भाषण को बड़े ध्यान से सुना जाता है और प्रतिपक्ष उसमें सरकार की कमियां निकालकर सरकार का ध्यान अपनी मांगों के प्रति आकर्षित करता है, मगर इस बार राज्यपाल का अभिभाषण विपक्ष के शोर शराबे की भेंट चढ़ गया तो मुख्यमंत्री का बजट भाषण भी कांग्रेस सदस्यों के वॉकआउट के कारण केवल सत्तापक्ष के सुनने के लिए ही रह गया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एक दिन पहले अस्वस्थ होने के बाद भी बजट भाषण लगातार ढाई घंटे तक बिना रुके सदन में पढ़ा। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बजट में अनेक सौगातें राज्य को दीं लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सदन में बजट भाषण के दौरान और बाद में भी नहीं आए।
भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ युकां के प्रदर्शन पर हुए लाठीचार्ज में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट और युवक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और विधायक अशोक चांदना के घायल होने से चाय के प्याले में जो तूफान उठा, वह मुख्यमंत्री के बजट भाषण पर जवाब तक हंगामे की शक्ल में कभी सदन और कभी सदन के बाहर चला। प्रतिपक्ष के विधायकों को एक ऐसा बड़ा मुद्दा सत्तापक्ष के खिलाफ मिल गया जिससे सदन की शक्ल हंगामेदार हो गई। सत्ता पक्ष ने इस मुद्दे को सदन में और बाहर लगातार पांच दिन तक गर्माए रखा। दो दिन सदन का बहिष्कार भी किया और दो दिन तक सदन के बाहर बैठकर धरना दिया और रामधुनी गाते हुए सत्ता पक्ष को सद्बुदिध देने की प्रार्थना की। इस दौरान सत्तापक्ष सदन में अपनी सरकार की खूबियां गिनाने में जुटा रहा तो प्रतिपक्ष धरने प्रदर्शन के लोकतांत्रिक हथियार से सदन के बाहर से ही सत्तापक्ष पर निशाने साधता रहा।
सत्ता पक्ष रहा हलकान - सदन के बाहर कांग्रेस विधायकों के धरने प्रदर्शन से सत्त्ता पक्ष सदन में हलकान रहा, और संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ और गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को बार- बार कांग्रेस को लौटने की अपील करनी पड़ी। सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर सदन में कमजेार पड़ता दिखाई दिया, सता पक्ष की अपील का असर कांग्रेस पर कम पड़ा और कांग्रेस विधायक अपने नेता रामेश्वर डूडी के नेतृत्व में एकजुट दिखाई दिए। उनमें कहीं भी फूट नहीं दिखाई दी और कांग्रेस की पूरी कमान नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी बखूबी संभाले रहे। इस दौरान सदन में कांग्रेस की अनुपस्थिति में राजपा के किरोडीलाल मीणा और गोलमा देवी, बहुजन समाज पार्टी के मनोज न्यांगली ने ही कमान संभाले रखी। मनोज न्यांगली शून्यकाल में भी अपने क्षेत्र के मामले उठाने में आगे रहे। सदन में कांग्रेस के हनुमानों के बाहर होने के कारण सत्ता पक्ष के अपनों नेे ही सत्ता पक्ष को घेरा।
अपनों ने ही घेरा - कांग्रेस की अनुपस्थिति में प्रतिपक्ष के बड़े धड़े के सदन में नहीं होने पर प्रतिपक्ष की कमान भी सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों ने संभाली। खासकर जोधपुर के विधायकों ने जोधपुर की उपेक्षा के आरोप सदन में लगाए। जोधपुर के विधायकों में कैलाश भंसाली, सूर्यकांता व्यास और बाबूसिंह ने सरकार को पिछली और अपनी सरकार के समय जोधपुर की उपेक्षा के कारण घेरा तो फसल खराबे के मामले पर अलवर जिले के विधायक रामहेत यादव ने अपनी सरकार को निशाने पर लिया। इसी तरह पंचायत पुनर्गठन के मामले पर पंचायत राजमंत्री सुरेंद्र गोयल को सत्ता पक्ष के विधायक हीरालाल रैगर ने पूरी तरह से घेरा और सत्ता पक्ष के ही विधायक रणधीर सिंह भिंडर ने भी पंचायत पुनर्गठन मामले में सदन में और सदन के बाहर $गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया पर तीखे हमले बोले और कहा कि कटारिया के कारण भिंडर में नई पंचायत समिति नहीं बन पाई। सदन में इस बार मुख्य प्रतिपक्षी दल कांग्रेस के बाहर रहने पर विधायक राव राजेंन्द्र सिंह ने भी अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को गंभीरता से उठाया और पिछली सरकार को निशाने पर लिया। सत्ता पक्ष के हनुमान की भूमिका हमेशा की तरह ही संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने संभाली। मंत्रियों में प्रभुलाल सैनी, अरुण चतुर्वेदी, राजपाल सिंह शेखावत, किरण माहेश्वरी, अजय सिंह किलक जैसे मंत्री ज्यादा सक्रिय नजर आए। महिला सदस्यों ने भी अपने प्रश्न सदन मे रखे हैं लेकिन अब तक वे ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आई हैं।
विधानसभा समीक्षा
राज्य विधानसभा के बजट सत्र की हंगामेदार शुरआात के बाद से ही सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष में उन्नीस बीस का खेल सदन के अंदर और बाहर चलता रहा है। युवक कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के बाद सदन से नौ विधायकों के निंलबन के कारण सत्ता पक्ष सदन में दमदार तो विपक्ष बाहर एकजुट दिखाई दिया।
सदन में कांग्रेस के विधायकों की अनपुस्थिति में सत्तापक्ष ने ही प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई और अपने ही मंत्रियों को खूब घेरा। राज्यपाल के अभिभाषण की तरह ही विपक्ष सदन की नेता और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के भाषण के समय गायब रहा और इस तरह बजट प्रस्तुत करते समय प्रतिपक्ष की अनुृपस्थिति से एक और पंरपरा टूट गई कि बजट भाषण के समय प्रतिपक्ष भी सदन में उपस्थित रहता है। फसल खराबे के मामले और पंचायतों के पुनर्गठन मामले में सरकार अपनों से ही घिरती नजर आई।
राज्य विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के समय भी परंपरा टूटी और दूसरी बार मुख्यमंत्री के बजट भाषण प्रस्तुत करने के समय भी परंपरा टूटी। आमतौर पर ऐसा होता आया है कि राज्यपाल के अभिभाषण और मुख्यमंत्री के बजट भाषण को बड़े ध्यान से सुना जाता है और प्रतिपक्ष उसमें सरकार की कमियां निकालकर सरकार का ध्यान अपनी मांगों के प्रति आकर्षित करता है, मगर इस बार राज्यपाल का अभिभाषण विपक्ष के शोर शराबे की भेंट चढ़ गया तो मुख्यमंत्री का बजट भाषण भी कांग्रेस सदस्यों के वॉकआउट के कारण केवल सत्तापक्ष के सुनने के लिए ही रह गया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एक दिन पहले अस्वस्थ होने के बाद भी बजट भाषण लगातार ढाई घंटे तक बिना रुके सदन में पढ़ा। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बजट में अनेक सौगातें राज्य को दीं लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सदन में बजट भाषण के दौरान और बाद में भी नहीं आए।
भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ युकां के प्रदर्शन पर हुए लाठीचार्ज में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट और युवक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और विधायक अशोक चांदना के घायल होने से चाय के प्याले में जो तूफान उठा, वह मुख्यमंत्री के बजट भाषण पर जवाब तक हंगामे की शक्ल में कभी सदन और कभी सदन के बाहर चला। प्रतिपक्ष के विधायकों को एक ऐसा बड़ा मुद्दा सत्तापक्ष के खिलाफ मिल गया जिससे सदन की शक्ल हंगामेदार हो गई। सत्ता पक्ष ने इस मुद्दे को सदन में और बाहर लगातार पांच दिन तक गर्माए रखा। दो दिन सदन का बहिष्कार भी किया और दो दिन तक सदन के बाहर बैठकर धरना दिया और रामधुनी गाते हुए सत्ता पक्ष को सद्बुदिध देने की प्रार्थना की। इस दौरान सत्तापक्ष सदन में अपनी सरकार की खूबियां गिनाने में जुटा रहा तो प्रतिपक्ष धरने प्रदर्शन के लोकतांत्रिक हथियार से सदन के बाहर से ही सत्तापक्ष पर निशाने साधता रहा।
सत्ता पक्ष रहा हलकान - सदन के बाहर कांग्रेस विधायकों के धरने प्रदर्शन से सत्त्ता पक्ष सदन में हलकान रहा, और संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ और गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को बार- बार कांग्रेस को लौटने की अपील करनी पड़ी। सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर सदन में कमजेार पड़ता दिखाई दिया, सता पक्ष की अपील का असर कांग्रेस पर कम पड़ा और कांग्रेस विधायक अपने नेता रामेश्वर डूडी के नेतृत्व में एकजुट दिखाई दिए। उनमें कहीं भी फूट नहीं दिखाई दी और कांग्रेस की पूरी कमान नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी बखूबी संभाले रहे। इस दौरान सदन में कांग्रेस की अनुपस्थिति में राजपा के किरोडीलाल मीणा और गोलमा देवी, बहुजन समाज पार्टी के मनोज न्यांगली ने ही कमान संभाले रखी। मनोज न्यांगली शून्यकाल में भी अपने क्षेत्र के मामले उठाने में आगे रहे। सदन में कांग्रेस के हनुमानों के बाहर होने के कारण सत्ता पक्ष के अपनों नेे ही सत्ता पक्ष को घेरा।
अपनों ने ही घेरा - कांग्रेस की अनुपस्थिति में प्रतिपक्ष के बड़े धड़े के सदन में नहीं होने पर प्रतिपक्ष की कमान भी सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों ने संभाली। खासकर जोधपुर के विधायकों ने जोधपुर की उपेक्षा के आरोप सदन में लगाए। जोधपुर के विधायकों में कैलाश भंसाली, सूर्यकांता व्यास और बाबूसिंह ने सरकार को पिछली और अपनी सरकार के समय जोधपुर की उपेक्षा के कारण घेरा तो फसल खराबे के मामले पर अलवर जिले के विधायक रामहेत यादव ने अपनी सरकार को निशाने पर लिया। इसी तरह पंचायत पुनर्गठन के मामले पर पंचायत राजमंत्री सुरेंद्र गोयल को सत्ता पक्ष के विधायक हीरालाल रैगर ने पूरी तरह से घेरा और सत्ता पक्ष के ही विधायक रणधीर सिंह भिंडर ने भी पंचायत पुनर्गठन मामले में सदन में और सदन के बाहर $गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया पर तीखे हमले बोले और कहा कि कटारिया के कारण भिंडर में नई पंचायत समिति नहीं बन पाई। सदन में इस बार मुख्य प्रतिपक्षी दल कांग्रेस के बाहर रहने पर विधायक राव राजेंन्द्र सिंह ने भी अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को गंभीरता से उठाया और पिछली सरकार को निशाने पर लिया। सत्ता पक्ष के हनुमान की भूमिका हमेशा की तरह ही संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने संभाली। मंत्रियों में प्रभुलाल सैनी, अरुण चतुर्वेदी, राजपाल सिंह शेखावत, किरण माहेश्वरी, अजय सिंह किलक जैसे मंत्री ज्यादा सक्रिय नजर आए। महिला सदस्यों ने भी अपने प्रश्न सदन मे रखे हैं लेकिन अब तक वे ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आई हैं।
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