पहुंचाया। इससे पहले शुक्रवार को हुई ओलावृष्टि और तेज बारिश से सरसों, गेहूं, चना और जीरा की कटने के कगार पर खड़ी रबी की फसलें खराब हो गईं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार जयपुर जिले में रबी की फसलों को 10 से 15 प्रतिशत नुकसान बताया जा रहा है जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। फागी उपखण्ड क्षेत्र के कई गांवों में दो दिन पूर्व ही ओलावृष्टि से फसल जमींदोज हो गई थी और अब शुक्रवार को भी उपखण्ड के कई गांवों में बूंदाबांदी से खेतों में पानी भर गया। जयपुर-टोंक मार्ग के गांवों में करीब 15 दिन पूर्व भी बारिश से फसलों को आंशिक नुकसान हुआ था और अब ओलावृष्टि और बारिश ने इनको पकने से पहले ही बर्बाद कर दिया। कमोबेश ऐसी स्थिति स्थिति किशनगढ़-रेनवाल, चौमूं, बस्सी और कई गांवों की है। यहां फसलों पर बारिश बैरन बनकर बरसी है। दूदू, आमेर, फागी, जमवारामगढ़ और किशनगढ़ रेनवाल में शुक्रवार को भी अच्छी बारिश होने से फसलें चौपट हो गईं। कृषि विभाग के आला अधिकारियों की मानें तो जयपुर जिले में 10 से 15 प्रतिशत नुकसान हुआ है लेकिन किसान इससे कहीं ज्यादा फसल खराबे के संकेत दे रहे हैं। उधर जयपुर-अजमेर मार्ग पर दूदू और बगरू और जयपुर-दिल्ली मार्ग पर स्थित कई गांवों में भी शुक्रवार को बारिश का कहर फसलों पर टूटा।
अभी तक शुरू नहीं हुआ नुकसान का आकलन
जयपुर सहित राज्य भर में फरवरी के अंत से शुरू हुए बिन मौसम की बरसात के दौर के बाद मार्च के शुरुआती दिनों तक के फसल खराबे के आकलन की रिपोर्ट तो आपदा प्रबंधन विभाग को मिलनी शुरू हो गई है लेकिन अब बीते दो-तीन दिन से चले आ रहे बारिश के दौर से हुए नुकसान का सरकारी नुमाइंदों ने अभी तक आकलन शुरू नहीं किया है।
रबी के लक्ष्य की पूर्ति में बाधक बनी बरसात
खाद की कमी के चलते देरी से शुरू हुई रबी की फसलों की बुवाई के लक्ष्य की पूर्ति मावठ की बरसात से हुए नुकसान के बाद पूरे होने चुनौती का कारण बन सकते हैं। आमतौर पर रबी की फसलें कटकर अप्रैल-मई माह में बिक्री के लिए मंडी में आ जाती है लेकिन कटाई के दौर में ही बारिश से फसलें खराब हो जाने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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