मध्यमवर्गीय परिवार नशे की चपेट में
15 March 2015
जयपुर। प्रदेश में युवा वर्ग नशे की चपेट में जकड़ता जा रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर साल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल एसएमएस अस्पताल में 400 से अधिक मरीज अपना इलाज करवाने के लिए पहुंच रहे हैं और इस आंकड़े में कमीं आने का नाम ही नहीं ले रही है।
यहां आने वाले अधिकांश मरीजों में शराब, अफीम, स्मेक, हीरोइन और चरस के आदी मरीज हैं। इससे भी गंभीर बात यह है कि इन मरीजों में 90 फीसदी युवा हैं।
काउंसलर की कमी
नशे के मरीजों की बढ़ती तादाद के बावजूद एसएमएस के नशा मुक्ति वार्ड में काउंसलर तक नहीं है। जिसके चलते यहां आने वाले मरीजों की काउंसलिंग नहीं हो पाती हैं। जबकि नशे के रोगी को काउंसलिंग की बहुत जरूरत होती है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी फेमेली काउंसलिंग की आवश्यकता होती है लेकिन एसएमएस में चिकित्सकों को ही सारा काम निपटाना पड़ रहा है जिसके कारण इलाज पूरी तरह कारगर नहीं हो पा रहा है।
हर माह तीस मरीज
एसएमएस अस्पताल में प्रतिमाह तीस से चालीस मरीज नशा मुक्ती होने के लिए पहुंच रहे हैं। कई बार तो इन मरीजों में बच्चे भी शामिल रहते हैं। जो इस बात का सबूत है कि नशे के सेवन की लत किस तरह फैलती जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि इस संख्या में कमी नहीं होना इसके बढ़ते खतरे का संकेत है।
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