5 February 2015
जयपुर। दवा मार्केट में फिलहाल किसी भी दवा की शॅर्टेज नहीं है। हालांकि प्रदेश मेंं चल रहे स्वाइन फ्लू के प्रकोप को देखते हुए राज्य सरकार ने मरीजों को सरकारी अस्पतालों में रोग की रोकथाम के लिए नि:शुल्क चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई है। इससे मरीजों को काफी हद तक मिल है।
मरीज को जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायत होने पर डॉक्टर की राय पर ही दवाएं लेनी चाहिए। वहीं संभव हो तो इसकी रोकथाम के लिए टीका भी लगवाना जरूरी है। इस तरह की बीमारियों से बचाब करना के लिए मास्क का लगाना, वैक्सिंग का टीका लगवाना और धूल मिट्टी से दूर रहें। कैमिस्ट वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के कोषाध्यक्ष निकुंज छीपा ने महानगर को अपनी एक भेंटवार्ता के दौरान ये विचार व्यक्त किए।
मेडिशन मार्केट में नहीं दवाओं की कमी
मेडिशन मार्केट में किसी भी दवा की कमी नहीं है। हालांकि दवा कानूनों के चलते कुछ रिटेलर बिना डॉक्टर की पर्ची के दवा देने में अपनी असमर्थता जताते हैं। जिससे बाजार में कुछ दवाओं की शॉर्टेज बता दी जाती है। आमतौर पर इन दवाओं में नारकोटिक्स दवाएं शामिल है इनमें मुख्य रूप से नींद की दवाएं, नसे की दवाएं, ड्रग्स और खांसी की सीरप सहित अनेक दवाएं हैं। जिन्हें कैमिस्ट बिना डॉक्टर की पर्ची देने में अपनी असमर्थता जता रहे हैं। जबकि कैमिस्टों के पास भी एसी दवाएं होती हैं। हालांकि इस तरह की दवाएं मार्केट में बलेक में बिकने लगती है।
नकली दवा बिक्री पर अंकुश
वे जीवन रक्षक इंजेक्शन और दवाएं जो प्रतिष्ठित कंपनियों निर्मित की जाती हैं। इन्हीं कंपनियों के लेबल से मिलती-जुलती दवाएं और इंजेक्शन लोकल कंपनियां बाजार में सप्लाइ कर रही है। जीवन रक्षक इंजेक्शन व दवा के कंपोजिशन में गड़बड़ी होने पर मरीज परेशान होते हैं। डायग्नोस में अगर सुगर के मरीज को यह इंजेक्शन लगा दिया गया तो मरीज खतरे में आ सकता है। हालंकि जिला प्रशासन और ड्रग कंट्रोलर नकली दवाओं की धर-पकड़ समय-समय पर करता है।
कंपनियों ने शुरू की पहल
बाजार में नकली दवाएं कम से कम बिकें इसके लिए कुछ कंपनियों ने दवाओं पर कोडिंग सुविधा जारी की है। ताकि ग्राहक असली और नकली में भेद जान सके। ग्राहक को अमुक दवा पर दिए गए कोड पर दवा का नाम निर्माण तिथि एस.एम.एस. करनी होती है। कुछ लोग डिस्काउंट के चक्कर में नकली दवाएं खरीद लेते हैं। दवाएं हमेशा विस्वास पात्र दुकानदार से ही खरीद कर बिल लेना न भूलें। सूमो एल.केम. और उुफास्टोन जैसी कंपनियों ने कोडिंग व्यवस्था की पहल शुरू की है।
क्या कोडिंग व्यवस्था
कंपनी द्वाारा निर्मित दवाओं पर कंपनी का मोबाइल नम्बर और एस.एम.एस. कोड नम्बर अंकित होता है। दवाओं पर कंपनी का मोबाइल नम्बर तो यथावत रहता है लेकिन कोड कब बदलना है यह कंपनी पर निर्भर है। कंपनियों ने कोड बदलने का भी समय निर्धारित किया है जिससे नकली दवा बिक्रेता को यह आभाष नहीं होगा कि कंपनी कब अपना कोड बदल रही है। इससे काफी हद तक नकली दवाओं पर अंकुश लगेगा।
मरीज को जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायत होने पर डॉक्टर की राय पर ही दवाएं लेनी चाहिए। वहीं संभव हो तो इसकी रोकथाम के लिए टीका भी लगवाना जरूरी है। इस तरह की बीमारियों से बचाब करना के लिए मास्क का लगाना, वैक्सिंग का टीका लगवाना और धूल मिट्टी से दूर रहें। कैमिस्ट वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के कोषाध्यक्ष निकुंज छीपा ने महानगर को अपनी एक भेंटवार्ता के दौरान ये विचार व्यक्त किए।
मेडिशन मार्केट में नहीं दवाओं की कमी
मेडिशन मार्केट में किसी भी दवा की कमी नहीं है। हालांकि दवा कानूनों के चलते कुछ रिटेलर बिना डॉक्टर की पर्ची के दवा देने में अपनी असमर्थता जताते हैं। जिससे बाजार में कुछ दवाओं की शॉर्टेज बता दी जाती है। आमतौर पर इन दवाओं में नारकोटिक्स दवाएं शामिल है इनमें मुख्य रूप से नींद की दवाएं, नसे की दवाएं, ड्रग्स और खांसी की सीरप सहित अनेक दवाएं हैं। जिन्हें कैमिस्ट बिना डॉक्टर की पर्ची देने में अपनी असमर्थता जता रहे हैं। जबकि कैमिस्टों के पास भी एसी दवाएं होती हैं। हालांकि इस तरह की दवाएं मार्केट में बलेक में बिकने लगती है।
नकली दवा बिक्री पर अंकुश
वे जीवन रक्षक इंजेक्शन और दवाएं जो प्रतिष्ठित कंपनियों निर्मित की जाती हैं। इन्हीं कंपनियों के लेबल से मिलती-जुलती दवाएं और इंजेक्शन लोकल कंपनियां बाजार में सप्लाइ कर रही है। जीवन रक्षक इंजेक्शन व दवा के कंपोजिशन में गड़बड़ी होने पर मरीज परेशान होते हैं। डायग्नोस में अगर सुगर के मरीज को यह इंजेक्शन लगा दिया गया तो मरीज खतरे में आ सकता है। हालंकि जिला प्रशासन और ड्रग कंट्रोलर नकली दवाओं की धर-पकड़ समय-समय पर करता है।
कंपनियों ने शुरू की पहल
बाजार में नकली दवाएं कम से कम बिकें इसके लिए कुछ कंपनियों ने दवाओं पर कोडिंग सुविधा जारी की है। ताकि ग्राहक असली और नकली में भेद जान सके। ग्राहक को अमुक दवा पर दिए गए कोड पर दवा का नाम निर्माण तिथि एस.एम.एस. करनी होती है। कुछ लोग डिस्काउंट के चक्कर में नकली दवाएं खरीद लेते हैं। दवाएं हमेशा विस्वास पात्र दुकानदार से ही खरीद कर बिल लेना न भूलें। सूमो एल.केम. और उुफास्टोन जैसी कंपनियों ने कोडिंग व्यवस्था की पहल शुरू की है।
क्या कोडिंग व्यवस्था
कंपनी द्वाारा निर्मित दवाओं पर कंपनी का मोबाइल नम्बर और एस.एम.एस. कोड नम्बर अंकित होता है। दवाओं पर कंपनी का मोबाइल नम्बर तो यथावत रहता है लेकिन कोड कब बदलना है यह कंपनी पर निर्भर है। कंपनियों ने कोड बदलने का भी समय निर्धारित किया है जिससे नकली दवा बिक्रेता को यह आभाष नहीं होगा कि कंपनी कब अपना कोड बदल रही है। इससे काफी हद तक नकली दवाओं पर अंकुश लगेगा।
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