पांच सालों में 61 बार हुई एटीएम मशीनों से छेड़छाड़
ठग कर रहे आए दिन खाते साफ,खाताधारक बेबस पुलिस लाचार
chandra shekhar sahu
4 FEBRUARY 2015
जयपुर। शहर में एटीएम में मशीनें कितनी सुरक्षित हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर से पिछले पांच वर्षों में बदमाश 61 एटीएम मशीनों को विभिन्न तरीकों से क्षतिग्रस्त कर बैखौफ अंदाज में नकदी चुरा चुके हैं। एटीएम मशीन से नकदी निकालने अथवा प्रयास करने की हर एक वारदात के बाद पुलिस और बैंक अधिकारियों को भारी शर्मिन्दगी झेलनी पड़ती है।
हाल ही में डीजीपी ओमेन्द्र भारद्वाज ने राज्यभर में एटीएम मशीनों को निशाना बनाने की घटनाओं सुरक्षा को लेकर चिन्ता जाहिर करते हुए बैंक अधिकारियों को अपने स्तर पर
ही एटीएम मशीन पर गार्ड की नियुक्ति अथवा होमगार्ड जवानों की एटीएम पर स्वैच्छिक तैनातगी का प्रस्ताव सुझाया था। इस सबके बावजूद सुरक्षा की अनदेखी करते हुए राज्यभर में हो चुकी दर्जनों एटीएम की वारदातों के बाद भी बैंक अधिकारी सुरक्षा गार्डांे को एटीएम मशीनों पर तैनात नहीं कर रहे हैं। लिहाजा बदमाश ऐसे में आसानी से वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
अकेले जयपुर कमिश्नरेट में ही एटीएम मशीन से छेड़छाड़ के 61 प्रकरण पूरे पांच सालों में सामने आ चुके हैं। इनमें झोटवाड़ा थाना इलाके में सर्वाधिक 15 और मानसरोवर जैसे सघन इलाके से भी चार प्रकरण एटीएम से छेड़छाड़ के दर्ज हो चुके हैं। पिछले वर्ष मानसरोवर रजत पथ स्थित बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से बदमाश गैस कटर के जरिए मशीन को काटते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार हुए थे जिनमें एक युवती भी शामिल थी। राजस्थान में एटीएम से छेड़छाड़ की घटना में पहली बार किसी महिला की संलिप्तता पुलिस को मिली थी। पिछले माह जिले के प्रागपुरा और गोविन्दगढ़ में एटीएम से बदमाश लाखों रुपए लेकर फरार हो गए थे। एटीएम मशीन में छेड़छाड़ के यह आंकड़े काफी भयावह हैं लेकिन इन वारदातों में पुलिस की कमजोरी के साथ-साथ बैंक अधिकारियों की खामोशी भी जिम्मेदार है जो सिर्फ एटीएम की स्थापना कर इतिश्री कर लेते हंै लेकिन गार्ड की कोई व्यवस्था नहीं करते।
एटीएम की सुरक्षा भगवान भरोसे
शहर भर में लगे ज्यादातार एटीएमों की सुरक्षा भगवान भरोसे हंै। ज्यादातर एटीएमों पर सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं हैं। इसी के चलते एटीएम पर एक बार में दो से ज्यादा लोगों एक ही समय एटीएम के भीतर आसानी से देखा जा सकता है। ऐसे में एटीएम के भीतर कार्ड बदलकर होने वाली ठगी के कई मामले सामने आ चुके हैं। इतना ही नहीं शातिर बदमाश मशीन में आलपिन अथवा पिन लगाकर एटीएम मशीन को हैंग कर नकदी को निकालकर कई खातों क ो साफ कर चुके हैं।
स्कीमर और स्पाई कैमरे से ठगी
पिछले वर्ष शातिर ठग देश के मुम्बई, दिल्ली, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में एटीएम के भीतर स्कीमर डिवाइस और स्पाई कैमरे लगाकर कई खाताधारकों के एटीएम की डिटेल लेकर उनके खातों से करोड़ों क ा बैलेंस साफ कर चुके हैं। जयपुर में ठगी के इस आधुनिक तरीके के 40 मामले जनवरी के प्रथम सप्ताह में सामने आए थे। अगर बैंक अधिकारी इस बात को लेकर गंभीर हो जाते तो इन शातिर ठगों की कारगुजारी से बचा जा सकता था।
फर्जी बैंक अधिकारी बन खाते साफ
शातिर ठग फोन के जरिए एटीएम धारक को फोन कर उसके एटीएम के बंद हो जाने की जानकारी देते हैं। फिर इसे वापिस चालू करवाने के लिए खाता धारक से कार्ड की डिटेल लेकर ऑनलाइन शॉपिंग कर ठगी करते हैं। ठगी का पता चलते ही पीडि़त के पास एफआईआर के सिवा कोई चारा नहीं होता। यह एटीएम के जरिए ठगी का सदाबहार तरीका है। इस तरह के फर्जी बैंक अधिकारी कई खातों को साफ कर चुके हैं।
मै क्या करुं थाने जाओ
एटीएम क ी ठगी का पता चलने पर जब पीडि़त संबंधित बैंक अधिकारी के पास जाता है तो बैंक अधिकारी पीडि़त को एफआईआर करने की सलाह दे देते हैं और पुलिस से जुड़ा मामला बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे में पीडि़त को न्याय नहीं मिल पाता है। पुलिस एटीएम से जुड़े मामलों की जांच तो करती है लेकिन हाई प्रोफाइल केस होने की वजह से अनुसंधान लम्बा खींच जाता है। ऐसे में पीडि़त की न्याय की आस पुलिसिया लेटलतीफी और बैंक की तटस्थता के चलते लम्बी खिंच जाती है।
पांच सालों में एटीएम से छेड़छाड़ में अव्वल थाने
थाना वारदात
झोटवाड़ा 15
बनीपार्क 5
मानसरोवर 4
मुरलीपुरा 3
ज्योतिनगर 3
सदर 2
मालवीयनगर 2
चौमूं 2
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