भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज हुए 385 मामले
27 January 2015
जयपुर। राज्य में भ्रष्टाचार का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। आधुनिक तकनीक के बावजूद राज्य में भ्रष्ट कर्मचारियों के हौसलें कम नहीं हुए है। राज्य में वर्ष 2014 में भ्रष्टाचार के आंकड़ों पर गौर करें तो भ्रष्टाचार में कमी के बजाए बढ़ोत्तरी देखने को मिली। वहीं भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने में भ्रष्टाचार निवारण
ब्यूरो फिसड्डी साबित हो रहा है।
ब्यूरो में फिलहाल 598 मुकदमों की जांच अभी पेन्डिंग में चल रही है। एसीबी के पास 2014 में भ्रष्टाचार के 385 मुकदमें दर्ज हुए जो कि 2013 में दर्ज मुकदमों 327 से 58 ज्यादा है। यानि एक वर्ष में भ्रष्टाचार के दर्ज मामलों में 18 फीसदी की बढ़ात्तरी हुई है। हालांकि वर्ष 2014 में प्राथमिक जांचों में भारी कमी आई है। इस वर्ष एसीबी में कुल 57 प्राथमिक जांच ही दर्ज हुई है जो कि 2013 के 199 मुकाबले 144 कम है।
पांच सालों में साढ़े तीन गुणा बढ़े मामले
अगर बात पिछले पांच सालों की की जाए तो एसीबी में दायर परिवादों में पिछले पांच सालों में ही दर्ज परिवादों में साढ़े तीन गुना की बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। वर्ष 2010 में एसीबी में 117 परिवाद भ्रष्टाचार से संबंधित दायर हुए वहीं वर्ष 2014 में बढ़कर इनकी तादात 385 तक जा पहुंची। यानि सीधे 230 फीसदी की बढोत्तरी। एसीबी की लगातार होती दबिश और भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध न्यायलयों में मुकर्रर सजाओं के बावजूद भ्रष्ट कर्मचारी अब भी भ्रष्टाचार में लिप्त है।
तकनीक हुई फेल
सरकार ने यूं तो भ्रष्टाचार रोकने के लिए लोकायुक्त के गठन जैसे हथकंड़े अपानए हैं। लेकिन दफ्तरों में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले साल वकीलों ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार क ी लिप्तता के खात्मे को लेकर एक महीने की हड़ताल कर न्यायलय से संबंधित कामकाज का बहिष्कार किया था। हर सरकारी दफ्तर में रिश्वत नहीं देने के पोस्टर चस्पा किए गए हैं और रिश्वत
मांगने पर हेल्पलाइन के नम्बर दिए हैं। लेकिन ये इन सब हथकंड़ों को अपनाने के बावजूद भ्रष्टाचार बेलगाम होता जा रहा है।
भ्रष्ट कर्मचारियों को सजा में देरी
एसीबी भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों को रंगे हाथों पकड़ तो लेती है लेकिन उन्हें सजा दिलाने के लिए एसीबी को लम्बी न्यायप्रक्रिया की लड़ाई लडऩा पड़ रहा है। वर्ष 2014 क अन्त तक एसीबी में 598 मुकदमे अभी पेन्डिंग में पड़े हुए हैं जबकि 2013 में 498 मुकदमे पेन्डिंग में थे। हालांकि एसीबी ने पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक 285 मुकदमों का निस्तारण किया। लेकिन भारी संखा में मुकदमे दर्ज होने के कारण भ्रष्ट कर्मचारियों पर नकेल कसने में एसीबी परी तरह सफल नहीं हो पा रहा है।
यह हैं एसीबी में दर्ज परिवादों के हाल
वर्ष दर्ज मुकदमे पूर्व में पेंडिंग कुल निस्तारण पेन्डिंग
2009 149 172 321 204 117
2010 212 117 329 116 213
2011 250 213 463 132 331
2012 258 331 589 212 377
2013 327 377 704 206 498
2014 385 498 883 285 598
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