31 January 2015
जयपुर। आजाद हुआ बचपन... जी हां राजधानी जयपुर में पिछले कई दिनों से बाल मजदुर मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन स्माइल अभियान के तहत जयपुर के कई इलाकों से मुक्त करवाए गए बच्चों की घर वापसी करवाई गई।
अपनी मज़बूरी और अपनों के ही दबाव के चलते मजदूरी करके अनपा पेट भरने पर मजबूर इन बच्चों के चेहरे पर दमकता आत्मविश्वास और घर वापसी की चाहत में खुशी झलक रही थी। जयपुर की कई एनजीओ और मानव तस्कर विरोधी टीम ने इन बच्चों को बिहार और बंगाल सरकार के प्रतिनिधियों को सुपुुर्द कर दिया।
यूं छलकी मासूमों की पीड़ा
मासूमों का कहना है कि अपने घर से कोसों दो वक्त की रोटी के लिए दिन रात हाड़तोड़ मजदूरी करते हंै और जो कुछ बचता है वो अपने परिवार के लिए भेजते हैं। मुक्त कराए गए बाल मजदूरों के लिए शनिवार का दिन खास रहा जब राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण, जिला टास्क फ ोर्स व पुलिस ने जयपुर शहर के कई थाना क्षेत्रों की और से छुड़वाए गए करीब 102 बच्चों को अपने-अपने घरों के लिए रवाना किया। कुल 20 बच्चों को जयपुर रेलवे स्टेशन से बिहार के लिए रवाना किया गया। जब इन मासूमों से बात की तो इन्होने बताया की इनसे 9 से 12 घंटे काम करवाया जाता है और हर हप्ते मात्र 50 रुपए दिए जाते हंै।
राजस्थान सरकार ने इन 102 बच्चो को तो बिहार सरकार के सुपुर्द कर अपनी जिम्मेदारी निभाई। लेकिन एक अनुमान के अनुसार फि लहाल करीब 10 हजार से ज्यादा बच्चे राजधानी के बाल मजदूरी करने के लिए मजबूर है। बच्चों को अजमेर सियालदह ट्रेन से बिहार भेजा गया है। इसके लिए बिहार से एक टीम बच्चों को लेने के लिए जयपुर आई है।
आरी तारी के काम से मिला छुटकारा
राजधानी में कई चूड़ी और आरी-तारी के कारखाने हैं जहां आज भी कई बच्चे बाल मजदूरी करने पर मजबूर हैं। इन बच्चो को न तो भरपेट खाना मिलता है और न ही रहने को कोई सुविधाएं। ऐसी जगह इन बच्चो से 12 घंटो से मजदूरी करवाई जाती है। एक अनुमान के हिसाब से राजधानी जयपुर में करीब 10 हजार से ज्यादा बच्चे काम करते है।
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