18/02/2014 6:20 PM
शीर्षक
- धर्म और अंधविश्वास लेखक - चन्द्रशेखर साहू
यूँ तो धर्म और
अंधविश्वास एक दूसरे के पूरक शब्द दिखाई पढ़ते हैं | धर्म को अन्धविश्वास के साथ जोड़कर देखा जाता है अथवा शायद इन्हे एक ही सिक्के के दो पहलु भी कहा जाता है | लेकिन वास्तव मे धर्म और
अंधविश्वास का कोई मेल नहीं है | धर्म आकाश है तो अंध विश्वास पाताल | धर्म पवित्र है,शुचि है तो अन्धविश्वास उतना ही अधिक मलिन |
धर्म के पतन का कारण अंध विश्वास है | हमने ईश्वर में विश्वास तो किया लेकिन अंधविश्वास | क्यूंकि धर्म के तथाकथित ठेकेदारो ने ने अपने अलग अलग भगवान बताकर लोगो का शोषण किया जो आज भी अनवरत जारी है | कुछ पाखंडियों ने तो खुद कि आरती तक रच डाली और अंध श्रद्धालु ऐसी तथाकथित महिमामंडित आरतियों में आध्यात्मिक सुख तलाशने लगा |
कुछ परम्परावादियों ने भी अपने अपने गद्दी गुरु को भगवान का अवतार बताकर अपना व्यापार किया |अंधविश्वास से ग्रस्त मुर्ख लोगो ने पाखंडियों कि समाधी व मंदिर/मज़ार तक बना दिए | यह सिर्फ अंधविश्वास ही था अगर धर्म में विश्वास होता तो शायद ऐसी तथाकथित समाधी व मंदिर/मज़ार नज़र नहीं आते |समाधी व मज़ार सिर्फ उन्ही लोगो कि बनाई जा सकती है जिन्होंने वास्तविकता में अपना जीवन धर्म के प्रचार में लगा दिया, अंधविश्वास के प्रचार में नहीं |परन्तु
अंध विश्वास
से ओतप्रोत मूर्खों ने ऐसा किया |
कुछ तथाकथित धर्म के ठेकेदारों के बहकावे में आकर लोगो ने सिर्फ धर्म का नाश ही किया है , धर्म का पालन नहीं | पाखंडियों के मनगढंत मंत्र जो किसी भी धर्म शास्त्र में उल्लेखित नहीं है, का जप आज मुर्ख मानव जप कर रहा है | मुर्ख मानव आज राम कृष्णा , अल्लाह, वाहे गुरु कि नहीं ढोंगी गुरुओं कि आराधना कर रहे हैं |
आज कोई रावण का मंदिर बना रहा है तो कोई मुर्ख सचिन का मंदिर बना रहा है , तो कोई मुर्ख रजनीकांत का |और ऐसे मंदिरो के ढोंगी पुजारी मांस मदिरा का भक्षण करते नज़र आ जायेंगे |लेकिन पाखंडियों के वश में आकर उनकी श्रद्धा अंधविश्वास में तब्दील हो गई |मुर्ख लोग ऐसे तुच्छ लोगों (भगवान कि तुलना में ,बेशक वे अच्छे कलाकार है |) कि आरती बना रहे हैं | अगर मुर्ख मानव थोडा भी सोचे तो आसानी से समझ सकता है कि ये लोग
भगवान नहीं है | सुना है झारखण्ड में सचिन का मंदिर बन रहा है तथाकथित पाखंडियों का ही हाथ होगा इसके पीछे |
अगर धर्म को ही खोजना है तो गीता , कुरान में खोजे | ईश्वर से मांगे तो काबिलियत न की भीख |
जिए तो दूसरों के लिए और अपने धर्म का पालन करे | और अपना जीवन पाखंडियों के बहकावे में बर्बाद न करे |
ईश्वर के प्रति अगाढ़ विश्वास और अन्धविश्वास का तिरस्कार करती यह कलम लिखना जारी रखेगी |

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