शीर्षक
-"दो सब्जी " लेखक - चन्द्रशेखर
साहू
मॉर्निंग वाक पर
कपिल सिब्बल का
चेहरा आज मुरझाया
सा दिखाई पड़
रहा था | पडोसी
मौलाना ने पूछा
सब खैरियत तो
है सिब्बल मियाँ
, धंधा पानी ठीक
चल रहा है
? सिब्बल ने बड़े
रूखे अंदाज़ में
ज़वाब दिया हाँ
चाचा सब खैरियत
है |
क्यूंकि भारत में
कही भी थूकने
की आजादी है
सो मौलाना ने
चबाते हुए पान
की पीक को
थूका और बोले
सब खैरियत है
तो जनाब यूँ मनमोहन
के जैसी शक्ल
क्यूँ बना रखी
है?
आजकल हर गरीब
दो सब्जियां खा
रहा है, साथ
में सलाद भी
, रुंधे हुए गले
से सिब्बल ने
जवाब दिया |
मौलाना ने सिब्बल
के फफक पड़ने
से पहले ही
उन्हें ढांढस बंधाया |
फिर अपने आप
को सम्भालते हुए
सिब्बल बोले जब
से गरीब दोनों
टाइम सब्जियां खाने
लगा है तब
से महंगाई बढ़
रही है , और
हमारी परेशानियां भी
| बस अब तो
दिन रात भगवान
से यही दुआ
करता हूँ कि
गरीब को सब्जी
तो दे पर
वो भी सिर्फ
एक समय की
| गरीबों को दो
वक़्त का खाना
हज़म होते मुझसे
देखा नहीं जाता
|
बेचारे मौलाना साहब का
चेहरा यह सब
सुनकर मनमोहन की
तरह हो गया
क्यूंकि खुद मौलाना
आश्चर्यजनक रूप से
गरीबी रेखा से
नीचे अर्थात BPL परिवार
की श्रेणी में
आते थे |
मौलाना और सिब्बल
अब दोनों एक
दूसरे के गले
लगे हुए थे
और रो रहे
थे |
नोट- काल्पनिक घटना पर
आधारित

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