Tuesday, 7 January 2014

पडोसी दुश्मन




शीर्षक -" पडोसी दुश्मन  "  कविचन्द्र शेखर साहू




सुन ले नीच पाकिस्तान तू ,
सब्र की भी एक इन्तेहा होती है |
तेरी हर  नापाक करतूत पर ,
शर्मसार मानवता होती है ||

जब जब भी तूने सरहद पर  वार किया ,
फ़ौज--हिंदोस्ता ने तगड़ा प्रहार किया |
हम तो है बड़े दयावान जिगर ,
जो तेरा अस्तित्व यूँ जहां में रहा  ||


शिकार भुखमरी का यह नंगा देश ,
अमेरिकी रोटियों पर पलता है |
और नेस्तनाबूद भारत को करने की ,
कोरी कल्पना दिलो -दिमाग में रखता  है ||

भूल गए अतिथि देवो भव का नारा ,
घुसपैठियों को मार भगाते है |
खाकर पिछवाड़े पर लात चार ,
फिर मुँह उठाये चले आते है ||



मौका मिले हर हिंदुस्तानी को तो ,
छटी का दूध याद दिल देंगे |
यूँ मार मार कर घुसपैठियों को ,
अफ़ग़ानिस्तान पार करा देंगे ||

वक़्त गया अब पाकिस्तान तू ,
भारतविरोधी गतिविधियां बंद करे |
नंगे भूखे  तेरे  देश में ,

रोटी कपडे का इंतज़ाम करे ||

2 comments:

  1. Bhai Saaheb Pyar failao nafrat nahi....
    Waise Pakistan ko sabak sikhana jaruri hai..

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  2. Zakir Saab aap sahi ho lekin yeh hakikat hai is kavita me Pakistan ko nasihat aur aatankiyon ko warnning di hai

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