शीर्षक -" पडोसी दुश्मन " कवि- चन्द्र शेखर साहू
सुन ले ऐ नीच पाकिस्तान तू ,
सब्र की भी एक इन्तेहा होती है |
तेरी हर
नापाक करतूत पर ,
शर्मसार
मानवता होती है ||
जब जब भी तूने सरहद पर वार किया ,
फ़ौज-ऐ-हिंदोस्ता ने तगड़ा प्रहार किया |
हम तो है बड़े दयावान जिगर ,
जो तेरा अस्तित्व यूँ जहां में रहा
||
शिकार भुखमरी का यह नंगा देश ,
अमेरिकी
रोटियों पर पलता है |
और नेस्तनाबूद भारत को करने की ,
कोरी कल्पना दिलो -दिमाग में रखता
है ||
भूल गए अतिथि देवो भव का नारा ,
घुसपैठियों को मार भगाते है |
खाकर पिछवाड़े पर लात चार ,
फिर मुँह उठाये चले आते है ||
मौका मिले हर हिंदुस्तानी को तो ,
छटी का दूध याद दिल देंगे |
यूँ मार मार कर घुसपैठियों को ,
अफ़ग़ानिस्तान पार करा देंगे ||
वक़्त आ गया अब पाकिस्तान तू ,
भारतविरोधी गतिविधियां बंद करे |
नंगे भूखे
तेरे
देश में ,
रोटी कपडे का इंतज़ाम करे ||

Bhai Saaheb Pyar failao nafrat nahi....
ReplyDeleteWaise Pakistan ko sabak sikhana jaruri hai..
Zakir Saab aap sahi ho lekin yeh hakikat hai is kavita me Pakistan ko nasihat aur aatankiyon ko warnning di hai
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