शीर्षक - " मौन
मोहन विदाई " लेखक -चन्द्रशेखर साहू
मनमोहन सिंह ने
अगले प्रधानमंत्री के
पद को अलविदा
क्या कहा , कड़ी
निंदा के समर्थकों
में शोक की
लहर दौड़ गई
| मनमोहन ने आखिर
जनभावनाओं की क़द्र
करते हुए प्रधानमंत्री
की कुर्सी छोड़ने
का मन बना
लिया | अपने सम्पूर्ण
कार्यकाल में पहली
बार मनमोहन ने
भारतीयों का दिल
जीत लिया | मनमोहन
सिंह चाहे हिंदुस्तानी
अवाम का दिल
न जीत सके
लेकिन विदेशियों का
दिल जीतने की
कला में वे
निपुण रहे | चाहे
वालमार्ट को भारत
लाकर , या परमाणु
समझोते पर हस्ताक्षर
करके मनमोहन ने
अमेरिका का दिल
जीत लिया | चीनी
सैनिकों के भारत
भ्रमण अर्थात घुसपैठ
पर मौन रहकर
चीन का दिल
जीता | भारतीय सैनिकों के
सर काट कर
ले जाने वाले
पाकिस्तान की सख्त
और कड़ी निंदा
कर पाकिस्तान का
मनमोहन ने जीत
लिया |
अपने सम्पूर्ण कार्यकाल में
मनमोहन ने हिंदुस्तान
को भ्रष्टाचार और
महंगाई के तोहफे
दिए | शायद इसीलिए
न तो अवाम
और ना ही
खुद कोंग्रेस मनमोहन
को अगला प्रधानमंत्री
के रूप मे
नहीं देखना चाहती
|
मनमोहन हमेशा ही विपक्ष
के निशाने पर
रहे | विपक्ष ने
उन्हें मंद मोहन
, मौन मोहन सरीखे
सम्बोधनों से पुकारा
लेकिन खामोश रहे
| और तो और
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़
शरीफ ने मनमोहन
को देहाती औरत
तक कहा लेकिन
फिर भी खामोश
रहे | हालांकि उनकी
ख़ामोशी विपक्ष को बर्दाश्त
नहीं हुई और
उनकी मुक्ति के
लिए एक यज्ञ
का आयोजन तक
किया | ऐसा उन्होंने
खुद एक साक्षात्कार
में स्वीकार किया
था |
खुद पेशे से
एक अर्थशास्त्री होने
के बावजूद मनमोहन
महंगाई पर काबू
न पा सके
| और तो महंगाई
का ठीकरा गरीब
आदमी के सर
फोड़ दिया | खुद
भ्रष्टाचारियों का राजा
होते हुए भी
अपना अपमान सहते
रहे | क्यूंकि प्रधानमंत्री
की कुर्सी उन्होंने
हासिल नहीं की
थी | बल्कि उन्हें
कुर्सी की देखभाल
करने के लिए
प्रधानमंत्री बनाया गया था
, ताकि शहज़ादे राहुल के
परिपक़्व होने तक
कुर्सी की सार
सम्भाल हो सके
| अब शहज़ादा राहुल
प्रधानमंत्री बनने के
काबिल हो गया
है अतः खैरात
में मिली सत्ता
सौपने का अब
माक़ूल समय आ
गया है | श्श्श्श्श्श.............
कोई आ रहा
है देखे कौन
है ???
चाय ले लो
, एकदम गरमा गरम
चाय ले लो
| पप्पू बोला - कितने की
दी ? चाय वाला
- ले लो बच्चे
फ्री की है
, अब पप्पू फ्री
की चाय पीने
में मस्त दिखाई
दे रहा है
, और शायद कह
रहा है - नॉनसेंस
चाय !! गिलास तोड़कर फेंक
देना किये इसमें
तो शक्कर ही
नहीं | चाय वाला
- महंगाई की मार
है पप्पूजी |
और वो ही
चाय वाला अर्थात
नरेंद्र मोदी कुर्सी
पर बैठने की
जुगत में है
| जी हाँ यह
स्वीकार करना कोई
गलत नहीं होगा
की आज सम्पूर्ण
भारत में नरेंद्र
भाई मोदी के
समक्ष कोई व्यक्तित्व
प्रधानमंत्री की
कुर्सी पर बैठने
के काबिल है
| यह मै
नहीं कहता जनता
और मीडिया का
सर्वे कह रहा
है |
बढ़ती महंगाई से लिखावट
की कीमत बढ़
चुकी है , बावजूद
शब्दो मे कमी
किये बगैर कलम
लिखना जारी रखेगी
............
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