Tuesday, 7 January 2014

शीर्षक  - " मौन मोहन विदाई "                         लेखक -चन्द्रशेखर साहू
मनमोहन सिंह ने अगले प्रधानमंत्री के पद को अलविदा क्या कहा , कड़ी निंदा के समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई | मनमोहन ने आखिर जनभावनाओं की क़द्र करते हुए प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ने का मन बना लिया | अपने सम्पूर्ण कार्यकाल में पहली बार मनमोहन ने भारतीयों का दिल जीत लिया | मनमोहन सिंह चाहे हिंदुस्तानी अवाम का दिल जीत सके लेकिन विदेशियों का दिल जीतने की कला में वे निपुण रहे | चाहे वालमार्ट को भारत लाकर , या परमाणु समझोते पर हस्ताक्षर करके मनमोहन ने अमेरिका का दिल जीत लिया | चीनी सैनिकों के भारत भ्रमण अर्थात घुसपैठ पर मौन रहकर चीन का दिल जीता | भारतीय सैनिकों के सर काट कर ले जाने वाले पाकिस्तान की सख्त और कड़ी निंदा कर पाकिस्तान का मनमोहन ने जीत लिया |
अपने सम्पूर्ण कार्यकाल में मनमोहन ने हिंदुस्तान को भ्रष्टाचार और महंगाई के तोहफे दिए | शायद इसीलिए तो अवाम और ना ही खुद कोंग्रेस मनमोहन को अगला प्रधानमंत्री के रूप मे नहीं देखना चाहती |






मनमोहन हमेशा ही विपक्ष के निशाने पर रहे | विपक्ष ने उन्हें मंद मोहन , मौन मोहन सरीखे सम्बोधनों से पुकारा लेकिन खामोश रहे | और तो और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री  नवाज़ शरीफ ने मनमोहन को देहाती औरत तक कहा लेकिन फिर भी खामोश रहे | हालांकि उनकी ख़ामोशी विपक्ष को बर्दाश्त नहीं हुई और उनकी मुक्ति के लिए एक यज्ञ का आयोजन तक किया | ऐसा उन्होंने खुद एक साक्षात्कार में स्वीकार किया था  |
खुद पेशे से एक अर्थशास्त्री होने के बावजूद मनमोहन महंगाई पर काबू पा सके | और तो महंगाई का ठीकरा गरीब आदमी के सर फोड़ दिया | खुद भ्रष्टाचारियों का राजा होते हुए भी अपना अपमान सहते रहे | क्यूंकि प्रधानमंत्री की कुर्सी उन्होंने हासिल नहीं की थी | बल्कि उन्हें कुर्सी की देखभाल करने के लिए प्रधानमंत्री बनाया गया था , ताकि शहज़ादे राहुल के परिपक़्व होने तक कुर्सी की सार सम्भाल हो सके | अब शहज़ादा राहुल प्रधानमंत्री बनने के काबिल हो गया है अतः खैरात में मिली सत्ता सौपने का अब माक़ूल समय गया है | श्श्श्श्श्श............. कोई रहा है देखे कौन है ???

चाय ले लो , एकदम गरमा गरम चाय ले लो | पप्पू बोला - कितने की दी ? चाय वाला - ले लो बच्चे फ्री की है , अब पप्पू फ्री की चाय पीने में मस्त दिखाई दे रहा है , और शायद कह रहा है - नॉनसेंस चाय !! गिलास तोड़कर फेंक देना किये इसमें तो शक्कर ही नहीं | चाय वाला - महंगाई की मार है पप्पूजी |
और वो ही चाय वाला अर्थात नरेंद्र मोदी  कुर्सी पर बैठने की जुगत में है | जी हाँ यह स्वीकार करना कोई गलत नहीं होगा की आज सम्पूर्ण भारत में नरेंद्र भाई मोदी के समक्ष कोई व्यक्तित्व प्रधानमंत्री  की कुर्सी पर बैठने के काबिल है | यह  मै नहीं कहता जनता और मीडिया का सर्वे कह रहा है |

बढ़ती महंगाई से लिखावट की कीमत बढ़ चुकी है , बावजूद शब्दो मे कमी किये बगैर कलम लिखना जारी रखेगी ............   

0 comments:

Post a Comment

 
 
Blogger Templates