Monday, 6 January 2014

मानवाधिक्कारी प्रशांत भूषण




शीर्षक - "मानवाधिक्कारी प्रशांत भूषण"     
समीक्षक  - चन्द्रशेखर साहू




खुद को आम आदमी का सेवक बताने वाला , आप के नेता प्रशांत भूषण को एक बार फिर पाकिस्तान पर प्रेम उमड़ आया | पाकिस्तान और प्रशांत भूषण का यह प्रेम प्रसंग कोई नया नहीं है | यह प्रेम प्रसंग काफी सालों से चला रहा है | ऑनर ऑफ़ किलिंग सभ्यता का पालन करते हुए एक राष्ट्रवादी भाई ने दो साल पहले प्रशांत भूषण की जमकर धुनाई भी की थी | फिर भी इसने पाकिस्तान से प्रेम नहीं छोड़ा |
अब तो प्रशांत भूषण ने कश्मीर में कत्ले आम के लिए राष्ट्र भक्त सेना पर ही ऊँगली उठा दी | खुद को मानवाधिकार का रक्षक बताने वाला यह शख्स हमेशा ही कट्टरपंथी ताक़तों का गुलाम रहा है |
आम आदमी  पार्टी को पाकिस्तान के चरमपंथी दलों से चुनाव में चंदा मिला , वो किसी से छुपा हुआ नहीं है | शायद प्रशांत भूषण जैसे व्यक्ति को देखकर ही पाकिस्तान ने चंदा दिया होगापहले भी प्रशांत भूषण कश्मीर की आज़ादी के लिए आवाज़ उठा चुके हैं | प्रशांत भूषण गुजरात दंगों में जितना फफक फफक  कर  मीडिया के सामने रोये थे , उतना तो शायद मृतक के परिजन भी नहीं रोये होंगे | प्रशांत भूषण ने कश्मीर में सेना के अस्तित्व पर जनमत संग्रह करने को कहा है | लेकिन इस शख्स को यह नहीं मालूम की राष्ट्रवाद के मुद्दो पर जनमत संग्रह नहीं कराया जाता | अगर ऐसे मुद्दो पर जनमत संग्रह हो तो राष्ट्र ही तबाह हो जाए | उदाहरण के लिए अगर पाकिस्तान का अस्तित्व मिटाने का जनमत संग्रह हो तो निश्चय ही जनमत पाकिस्तान के खिलाफ जाएगा | फैसले हमेशा सिर्फ ज़ज्बातों पर नहीं लिए जाते , उनका आधार होता है , परिमाण होता है | यूँ जनभावनाओं का ख्याल रखते  तो 'आप ' सरकार नहीं चला रहे होते | जनमत संग्रह में आप नंबर दो की पार्टी है , की अव्वल |
 आज प्रशांत भूषण जैसे लोग भारत वर्ष में  अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं | आखिर किस कत्ले आम का वो जिक्र कर रहा है ? कश्मीरी पंडितों की हत्या पर जो  दो दो बोल नहीं बोला ? किश्तवाड़ में हुए सुनियोजित दंगों में जिसने दो आंसू बहाने पर इंकार कर दिया | असम में बांग्लादेशियों के द्वारा मचाई गई लूटपाट , दंगों पर कुछ नहीं बोला | मुजफ्फरनगर दंगों पर भी चुप | लेकिन भाई आज भी गुजरात दंगों पर इनसे पूछा जाए तो ढेरों आंसू बह आयेंगे |
चार लाइन लिख देता हूँ -

यूँ जनमत संग्रह करने से
समस्या का समाधान नहीं होगा 
करके किसी धर्म का अपमान
कोई नेता सेकुलर नहीं होता
जो करता हो बात राष्ट्रवाद की
सिर्फ वो ही नेता हमें प्यारा होगा |
करे जो बात हिमाकत पाकिस्तान की
हम लोगो को यह मंजूर नहीं
छोड़ दे तत्काल हिंदुस्तान वो शख्स
होगा भारत खुशहाल तभी 

कुछ युवा दोस्त मेरे इस लेख से दुखी होंगे क्यूंकि मैंने उनके नेता को भला बुरा कहा | लेकिन मूर्खो सिर्फ कैंडल लेकर हाथो में झाड़ू थामकर समाज सुधार नहीं होगा , जाकर करो अपने नेता का विरोध तभी जाकर राष्ट्र का कल्याण होगा |
 सुनहरे भारत वर्ष का स्वप्न  देखती  और माँ भारती के शीश मुकुट जगमग देखने को तत्पर यह कलम सिर्फ राष्ट्र सेवा में समर्पित रहेगी |


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