Saturday, 4 January 2014

अरविन्द राजतिलक


सन्दर्भ - "अरविन्द राजतिलक " समीक्षक - चन्द्रशेखर साहू 

दिल्ली के राजसिंहासन को , जिसको पाने के लिए सभी राजनेताओं कि लार टपकती है, को एक नया राजा मिल गया है | राजा भी ऐसा जो न तो किसी राजवंश से और ना ही किसी गुलाम वंश से ताल्लुकात रखता हो |
राजनैतिक गन्दगी से ऊब चुके दिल्ली वासियों ने 'आप' के प्रति अभूतपूर्व विश्वास जताते हुए 28 सीटे प्रदान की | और भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी |
अँधेरी नगरी को वर्षों बाद चौपट राजा से मुक्ति मिली | दिल्ली को अँधेरी नगरी कहा जा सकता है क्यूंकि हज़ार बरस की गुलामी के दौरान बगावत का एक सुर तक वहाँ दिखाई न दिया | भाजपा ने गहरी रणनीतिक चाल चलते हुए खुद को राजसिंहासन से दूर रखा ताकि अपना पूरा ध्यान मिशन मोदी पर लगा सके | कांग्रेस ने मजबूरी में ही सही आप को समर्थन देकर यह जताने की कोशिश की है की वो जनता की हितैषी है |
आज अरविन्द केजरी वाल अँधेरी नगरी के राजा है वो भी पूर्व चोपट राजा की सांठ गाँठ से | एक सदाचारी तो दूसरा भ्रष्टाचारी , एक दूसरे के प्रति क्या निभा पाएंगे वफादारी ? कॉंग्रेस के पास तो विकल्प ही नहीं बचा समर्थन के अलावा, क्यूंकि फिर से चुनाव उसकी सेहत के लिए सही नहीं है |
बहरहाल आज का दिन दिल्ली के लिए ऐतिहासक है | मैकेनिकल इंजीनियर केजरीवाल के समक्ष एक चुनौती है , जनता के सपनों पर खरा उतरने की , सामने बैठा मजबूत विपक्ष , एक काँटों भरा सफ़र | क्या वो दिल्ली को रिपेयर कर पाएंगे ? बढ़ता वक़्त ही हर प्रश्न का उत्तर दे देता है ,और भविष्य को देखना तो आज भी मेरे वश में नहीं है |
घर की सुरक्षा के लिए मकान मालिक वफादार कुत्ता पालता है लेकिन यह भेड़िये की नस्ल का निकल जाए तो ? गठबंधन सरकारे भी इसी संशय में रहती है | ठीक इसी तरह आप ने गठजोड़ तो कोंग्रेस से कर लिया है पर फिर भी , डर ... डर .. और सिर्फ डर .....
खैर केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनते देख दिल खुश है और हम उनको हमारी मंगल कामनाएं उन्हें प्रदान करते है |
कड़ाके की इस ठण्ड में सिर्फ बदन ही नहीं हड्डियां भी धूज रही है ,बदस्तूर लिखने का क्रम जारी रहेगा .....

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