जयपुर। राजस्थान क्रिकेट एसोशिएसन के अध्यक्ष और आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी को बड़ा झटका लगा है। मोदी के खिलाफ बोर्ड में अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है।
17 जिला संघ सदस्यों ने ललित मेदी के खिलाफ वोट दिया, जबकि 13 सदस्य वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहे। सिर्फ एक सदस्य ने उनके पक्ष में वोट किया। इसके साथ ही ललित मोदी आरसीए से बाहर हो गए हैं। मोदी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होने से साफ हो गया है कि बीसीसीआई में उनके वापस आने की उम्मीद कम हो गई है।
ललित मोदी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सिर फुटौव्वल की नौबत तक आ गई। अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले मोदी समर्थक और विरोधियों में जमकर झड़प हुई। झड़प के दौरान जमकर पत्थरबाजी हुई और बसों में तोडफ़ोड़ की गई। यहां तक कि सवाई मान सिंह स्टेडियम परिसर के बाहर पत्थरबाजी तक हो गई। मोदी विरोधी गुट के अमीन पठान ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। पठान गुट का दावा था कि उनके पास 23 वोट हैं। मोदी को हटाने के लिए 33 में से 25 जिला संघों के वोट चाहिए। पठान ने दावा किया कि जरूरी दो वोट भी उन्हें मिल जाएंगे। वोटिंग को देखते आरसीए में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। मोदी गुट ने वोटिंग में गड़बड़ी होने की आशंका भी जताई थी। ऐसे में वोटिंग राजस्थान स्पोर्ट काउंसिल ने करवाई। विरोधी गुट के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए 33 में 25 जिला संघों का समर्थन यानी दो तिहाई वोटों की जरुरत थी, तो मोदी को कुर्सी पर बने रहने के लिए 9 जिला संघों के वोटों की दरकार। मोदी कैंप ने दावा किया था कि उनके पास 10 मत हैं। ऐसे में किसी भी हालात से निपटने के लिए सवाई मानसिंह स्टेडियम को छावनी में बदल दिया गया। इस दौरान जिला संघों के वोटरों के अलावा किसी को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था। इसी तनाव के चलते स्टेडियम के बाहर दोनों के समर्थक भिड़ गए।
बैठक में शामिल होने से रोका: आब्दी
मोदी के करीबी महमूद आब्दी ने मोदी समर्थकों को बैठक में शामिल होने से रोके जाने का आरोप लगाया। आब्दी ने कहा कि उनकी बस पर पथराव हुआ और हथियारबंद लोगों ने हमला किया। यह आरसीए के अध्याय में एक काला दिन है। आब्दी ने कहा कि यह घटना राजस्थान विधानसभा से कुछ ही मीटर की दूरी पर दिनदहाड़े हुई और इसमें सुरक्षाकर्मियों सहित करीब 15 लोगों को चोटें आईं। आब्दी ने कहा कि आरसीए के संविधान के मुताबिक, अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन होना जरूरी है. उन्होंने दावा किया कि ललित मोदी के समर्थन में 15 जिला संघों के प्रतिनिधि थे।
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