10 March 2015
जयपुर। प्रदेश में 50 लाख रुपए से अधिक की सम्पत्ति की रजिस्ट्री करवाने के लिए अब ज्यादा जेब ढीली करनी होगी। मुख्यमंत्री ने 50 लाख रुपए मूल्य से अधिक की सम्पत्ति के खरीद-बेचान की रजिस्ट्री पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी बढ़ा दी है। बजट प्रस्ताव के अनुसार इस राशि से अधिक की रजिस्ट्री पर अब एक फीसदी पंजीयन शुल्क लगेगा।
अभी तक यह शुल्क एक फीसदी अथवा अधिकतम 50 हजार रुपए वसूल किया जाता था लेकिन बजट प्रस्तावों में अधिकतम राशि की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। ऐसे में अब कुल कीमत की एक फीसदी राशि क्रेता-विके्रता को पंजीयन शुल्क के रूप में चुकानी होगी।
उदाहरण के तौर पर वर्तमान में एक करोड़ रुपए मूल्य की अचल सम्पत्ति पर पंजीयन शुल्क 1 प्रतिशत के हिसाब से एक लाख रुपए बनता है, लेकिन अधिकतम राशि की बाध्यता के चलते इस पर शुल्क 50 हजार रुपए ही चुकाना होता था। अब बजट प्रस्तावों के अनुसार इस पर एक फीसदी के हिसाब से एक लाख रुपए स्टाम्प ड्यूटी चुकानी होगी।
कृषि भूमि की खरीद सस्ती
बजट में सरकार ने कृषि भूमि की खरीद पर लगने वाली रजिस्ट्री को कम करने की घोषणा की है। घोषणा के मुताबिक किसी कम्पनी, फर्म या संस्था द्वारा यदि कृषि भूमि की खरीद की जाती है तो उस भूमि का मूल्य कृषि भूमि की सामान्य दर से ही तय किया जाएगा। जबकि वर्तमान में प्रावधान है कि कृषि भूमि की खरीद पर भूमि का मूल्यांकन डेढ़ गुणा दर से पंजीयन शुल्क वसूल किया जाता है। केवल उसी स्थिति में भूमि का मूल्यांकन सामान्य दर से किया जाता है जिसमें भूमि का क्रय राज्य सरकार की किसी योजना के अंतर्गत होता है।
इनकी रजिस्ट्री होगी सस्ती
- बजट में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के आवासों की रजिस्ट्री पर लगने वाले पंजीयन शुल्क को घटाने की घोषणा की है। वर्तमान में इन वर्ग पर पंजीयन शुल्क 1 प्रतिशत लगता है। घोषणा के मुताबिक अब पंजीयन शुल्क 1 प्रतिशत या अधिकतम 1 हजार रुपए जो भी कम हो वह लगेगा।
- अचल सम्पत्ति (खाली भूखण्ड) का एक वित्तीय वर्ष में पहली बार हस्तांतरण के बाद दूसरी या उससे अधिक बार हस्तांतरण पर कुल देय स्टाम्प डयूटी राशि पर 10 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की गई है।
- प्राइवेट यूनिवर्सिटी को बढ़ावा देने के लिए यूनिवर्सिटी खोलने वाली फर्म के पक्ष में अचल सम्पत्ति का हस्तांतरण करने पर भी स्टाम्प डयूटी में छूट दी जाएगी।
- ऑपरेशन विजय (कारगिल) अथवा अन्य रक्षा अभियानों में शहीद जवानों की विधवाओं को राज्य सरकार द्वारा आवंटित भवन या फ्लैट पर ऋण लेने के लिए वित्तीय संस्थाओं के पक्ष में मॉरगेज डीड (गिरवी पट्टïा) करवाने पर अब स्टाम्प ड्यूटी नहीं लगेगी।
- स्कूल, अस्पताल, धर्मशाला आदि सार्वजनिक उपयोग के लिए राज्य सरकार, स्थानीय निकाय अथवा सार्वजनिक उपक्रम को भूमि अथवा भवन आदि दान में देने पर लगने वाली स्टाम्प व पंजीयन शुल्क खत्म करने की घोषणा की है। ऐसे में अब दानदाताओं को किसी तरह का शुल्क नहीं देना पड़ेगा।
- मॉरगेज डीड पर स्टाम्प डयूटी 2 प्रतिशत से कम करके 0.15 प्रतिशत कर दी गई है।
यहां चुकाना होगा शुल्क
-निविदा प्रक्रिया के तहत किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले संबंधित ठेकेदार को बैंक गारंटी जमा करवानी पड़ती है। अब उस बैंक गारंटी पर ठेकेदार को 0.25 प्रतिशत और अधिकतम 25 हजार रुपए स्टाम्प डयूटी देनी होगी।
- नए हथियार लाईसेंस लेने या नवीनीकरण के मामलों पर भी स्टाम्प डयूटी लगाने की घोषणा की गई है।
- लोन एग्रीमेंट तथा इक्वीटेबल मॉरगेज डीड पर स्टाम्प डयूटी 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दी गई है।
बकायादारों को राहत
स्टाम्प ड्यूटी के बकायादारों को मुख्यमंत्री ने राहत दी है। वर्तमान में बकाया स्टाम्प ड्यूटी पर 12 प्रतिशत चक्रवृद्धी ब्याज वसूला जाता है, लेकिन अब चक्रवृद्धी ब्याज के स्थान पर सामान्य ब्याज ही वसूला जाएगा। इसके अलावा जो 2 प्रतिशत पेनल्टी प्रतिमाह की दर से वसूली जाती है उसे 1 प्रतिशत प्रतिमाह करने की घोषणा की है।
मिक्स लंैडयूज के लिए दरें होंगी निर्धारित
वर्तमान में निकायों द्वारा जारी आवासीय, वाणिज्यिक तथा संस्थानिक पट्टों पर ही अलग-अलग दर से स्टाम्प व पंजीयन शुल्क वसूला जाता है। लेकिन बजट में सरकार ने मिश्रित भू-उपयोग के लिए जारी होने वाले पट्टïे पर अलग से पंजीयन दरें निर्धारित करने का निर्णय किया है। सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में मिश्रित भू-उपयोग वाले पट्टïों पर स्टाम्प डयूटी अलग-अलग जगह के अनुरूप वाणिज्यिक या आवासीय दर से वसूली जाती है। इससे कई जगह विरोधाभास स्थिति पैदा होती है।
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