Saturday, 14 March 2015

बारिश ने किए हालत बदतर, संक्रमण का खतरा

barish के लिए चित्र परिणामरैन बसेरों में पानी, गंदगी और बदबू ने किए हाल बेहाल
15 March 2015
जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े राजकीय सवाई मान सिंह अस्पताल में रैन बसेरे की व्यवस्थाएं लाचार हो गई हैं। अस्पताल स्थित रैन बसेरे में आलम यह है कि जगह फैली गंदगी और बदबू ने परिजनों की नाक में दम कर दिया है।
बीते दो दिन हो रही बारिश से परिजन पहले ही परेशान थे उनका कहना है कि अब तो रैन बसेरे में जगह-जगह सिर्फ पानी ही भरा है। रात काटने का भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। परिजनों के लिए रैन बसेरे में रात गुजारना एक सजा से कम नहीं है क्योंकि बारिश का पानी हर ओर फैल गया है, बिस्तर भी गीले हो गए है। बारिश से बचने के लिए परिजन इधर-उधर भटकते नजर आए। अस्पताल के भीतर जाने पर गार्ड उन्हें बाहर भेज रहा था। कई परिजन इस लचर व्यवस्था को कोसते नजर आए। ऐसा नहीं है कि इसकी घटना की जानकारी एसएमएस अधीक्षक को नहीं है लेकिन वे भी सबकुछ जानते हुए अनजान रहें। उनका कहना था कि रैन बसेरे की जिम्मेेदारी नगर-निगम की होती है, उसे ही व्यवस्थाएं सुधारनी चाहिए ।
टीन शेड बना सहारा 
लालसोट से बेटे इलाज के लिए एसएमएस अस्पताल आए एक परिजन किशन लाल ने बताया कि उसके बेटे को सीने दर्द में होता है जिसके चलते वह बेटे का इलाज करवाने अस्पताल में आया है लेकिन बारिश की वजह से उसे रैन बसेरे में चैन से सोने नहीं मिला बारिश से बचने के लिए शेड का सहारा लिया लेकिन यहां भी गदंगी की बदबू  ने उसे बेहाल कर दिया ।
बीमारी का खतरा 
अपने पिता को दिखाने आए रामेश्वर मीणा ने बताया कि वह दौसा का रहने वाला है। रैन बसेरे में वह बीते चार दिन रूका हुआ है लेकिन यहां फैली गंदगी ने वह परेशान है। रामेश्वर की मानें तो गदंगी से भयंकर बदबू आ रही है । जो कि परेशानी एक सबक बन गई है। रामेश्वर के अनुसार पिताजी का इलाज कराते हुए यदि वह ज्यादा दिन रैन बसेरा  में रूका तो वह खुद  ही बीमार हो जाएगा। ऐसा अन्य परिजनों का भी कहना है ।

संक्रमण का खौफ 
प्रदेश में जहां स्वाइन फ्लू का खौफ है वहीं रैन बसेरे में फैली गदंगी ने मरीजों और परिजनों की चिंता और बढ़ा दी है। परिजनों की मानें तो परिसर में फैली इस तरह गदंगी से संक्र मण फैल सकता है और वे स्वाइन फ्लू या अन्य रोगों से ग्रसित हो सक ते हैं। अस्पताल प्रशासन को इस और ध्यान देना चाहिए ताकि मरीजों व उनके परिजनों को सक्रंमण जैसी भयावह बीमारी से राहत मिल सकें। और अस्पताल परिसर में बदबू पर भी काबू पाया जा सके।

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