बाला साहब देवरस की जन्मशती सामाजिक समरसता के रूप में मनेगी
19 March 2015
जयपुर। जात-पांत और ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर हिन्दू समाज में एकरसता का भाव विकसित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने तृतीय सरसंघचालक मधुकर दत्तात्रेय देवरस(बाला साहब देवरस) की जम्र शती को इस वर्ष सामाजिक समरसता के रूप में मनाएगा।
इस श्रंखला में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सर्वाेच्च संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक में नागपुर आए सभी प्रतिनिधियों का आव्हान किया है।
इस संबंध में जयपुर प्रांत के संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने मंगलवार को प्रेसवार्ता में बताया कि तीन दिन तक चलने वाली संघ की वार्षिक सभा है। जिसमें देशभर से चुने हुए प्रतिनिधि, क्षेत्रीय, प्रान्तीय कार्यकारिणी एवं विचार परिवार के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इनमें 1462 में से 1375 प्रतिनिधि उपस्थित हुए। संघ दृष्टि से बनाए गए 11 क्षेत्रों के संघचालकों का चुनाव भी हुआ जिसमें राजस्थान क्षेत्र के संघचालक के रूप में सर्व सम्मति से डॉ. भगवती प्रकाश शर्मा का निर्वाचन हुआ।
प्रतिनिधि में अपने उद्बोधन में सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने समाज की एकजुटता के लिए सामाजिक जीवन में सर्वप्रथम जलाशय, शमशान एवं मंदिर सभी समाज बंधुओं के लिए सतत प्रयासरत रहने का आग्रह किया। उन्होने वर्तमान समय में कमजोर हो रही परिवार व्यवस्था को पुन: व्यवस्थित करने के लिए कुटुम्ब प्रबोधन पर बल दिया।
19 March 2015
इस श्रंखला में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सर्वाेच्च संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक में नागपुर आए सभी प्रतिनिधियों का आव्हान किया है।
इस संबंध में जयपुर प्रांत के संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने मंगलवार को प्रेसवार्ता में बताया कि तीन दिन तक चलने वाली संघ की वार्षिक सभा है। जिसमें देशभर से चुने हुए प्रतिनिधि, क्षेत्रीय, प्रान्तीय कार्यकारिणी एवं विचार परिवार के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इनमें 1462 में से 1375 प्रतिनिधि उपस्थित हुए। संघ दृष्टि से बनाए गए 11 क्षेत्रों के संघचालकों का चुनाव भी हुआ जिसमें राजस्थान क्षेत्र के संघचालक के रूप में सर्व सम्मति से डॉ. भगवती प्रकाश शर्मा का निर्वाचन हुआ।
प्रतिनिधि में अपने उद्बोधन में सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने समाज की एकजुटता के लिए सामाजिक जीवन में सर्वप्रथम जलाशय, शमशान एवं मंदिर सभी समाज बंधुओं के लिए सतत प्रयासरत रहने का आग्रह किया। उन्होने वर्तमान समय में कमजोर हो रही परिवार व्यवस्था को पुन: व्यवस्थित करने के लिए कुटुम्ब प्रबोधन पर बल दिया।
0 comments:
Post a Comment