** हास्य कविता "फैशन का
दौर" कवि
-चंद्रशेखर साहू **
यही तो आगे
बढ़ने कि होड़
है
क्यूंकि यह फैशन
का दौर है
||
देख करीना का जीरो
फिगर
शहरी कुंवारी का मचल
जिगर
छोड़ा उसने अन्न
और जल
सूखकर काँटा हो गया
बदन ||
यही तो जीरो
फिगर बनाने की
होड़ है
क्यूंकि यह फैशन
का दौर है
||
देख मल्लिका शेरावत के
जलवे
छोरियों के हुए
तंग कपडे
अब जाकर हुई
शीला जवान
छोरो का जीना
हुआ हराम ||
यही तो कम
कपडे पहनने कि
होड़ है
क्यूंकि यह फैशन
का दौर है
||
लिया बैग पहन
मिनी स्कर्ट
चले छोकरी कमर लचकाए
भावनाएँ आये जो
छोरे की बाहर
हवालात की हवा
वो खाये ||
यही तो हवालात
जाने कि होड़
है
क्यूंकि यह फैशन
का दौर है
||

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