Sunday, 23 February 2014

"फैशन का दौर"






** हास्य कविता  "फैशन का दौरकवि -चंद्रशेखर साहू **

यही तो आगे बढ़ने कि होड़ है
क्यूंकि यह फैशन का दौर है ||

देख करीना का जीरो फिगर
शहरी कुंवारी का मचल जिगर
छोड़ा उसने अन्न और जल
सूखकर काँटा हो गया बदन ||

यही तो जीरो फिगर बनाने की होड़ है
क्यूंकि यह फैशन का दौर है ||

देख मल्लिका शेरावत के जलवे
छोरियों के हुए तंग कपडे
अब जाकर हुई शीला जवान
छोरो का जीना हुआ हराम ||
यही तो कम कपडे पहनने कि होड़ है
क्यूंकि यह फैशन का दौर है ||

लिया बैग पहन मिनी स्कर्ट
चले छोकरी कमर लचकाए
भावनाएँ आये जो छोरे की बाहर
हवालात की हवा वो खाये ||
यही तो हवालात जाने कि होड़ है
क्यूंकि यह फैशन का दौर है ||




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